हत्या के प्रयास मामले में दो दोषी करार: गवाह बयान से मुकरा, फिर भी कोर्ट ने सुनाई 3-3 साल की सजा
भिंड जिले के गोहद स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने करीब साढ़े चार साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। खास बात यह रही कि मामले का फरियादी सुनवाई के दौरान अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया, लेकिन अदालत ने उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।
अदालत में सुनवाई के दौरान फरियादी ने अपने पूर्व बयान से अलग बयान दिया, जिससे वह शत्रुतापूर्ण (होस्टाइल) गवाह बन गया। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने अन्य गवाहों, दस्तावेजी साक्ष्यों और जांच में जुटाए गए सबूतों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने में सफल रहा है। अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के प्रयास के अपराध का दोषी मानते हुए प्रत्येक को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि केवल फरियादी के बयान से मुकर जाने भर से पूरा मामला कमजोर नहीं हो जाता, यदि अन्य साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हों। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय और पर्याप्त मानते हुए दोषसिद्धि का निर्णय दिया।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। अदालत ने पाया कि फरियादी ने न्यायालय में अपने पहले दिए गए बयान के विपरीत गवाही दी। इसे गंभीर मानते हुए न्यायालय ने उसके खिलाफ झूठी गवाही (परजरी) देने के मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि यदि कोई गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर भी जाए, तब भी अन्य मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि संभव है। वहीं, झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

