माखननगर में आदिवासी समाज का धरना 25वें दिन भी जारी, अब दूसरे संगठनों का समर्थन; आज होगी आमसभा
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आदिवासी समाज का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। माखननगर तहसील कार्यालय के सामने सर्व आदिवासी समाज की ओर से चलाया जा रहा यह आंदोलन मंगलवार को 25वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से चल रहे धरने को अब अन्य आदिवासी संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
धरना स्थल पर मंगलवार को आमसभा आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होकर आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। आमसभा को लेकर आंदोलनकारियों में उत्साह है और माना जा रहा है कि इसमें आंदोलन को और व्यापक बनाने से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, सर्व आदिवासी समाज की ओर से अपनी मांगों को लेकर माखननगर तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
धरने को अब अन्य संगठनों का समर्थन मिलने से आंदोलन का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। वनवासी कृषि एवं ग्रामीण मजदूर संघ समेत कई संगठनों के प्रतिनिधियों के आमसभा में पहुंचने की संभावना है। संगठनों की ओर से आंदोलनकारियों के साथ खड़े रहने और उनकी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने की बात कही जा रही है।
धरना स्थल पर आंदोलनकारियों की ओर से लगातार बैठकें और चर्चा की जा रही हैं। इसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने और प्रशासन तक अपनी मांगें मजबूती से पहुंचाने को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से धरना जारी रहने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
मंगलवार को होने वाली आमसभा को आंदोलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें शामिल होने वाले संगठन अपनी बात रखेंगे और आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज करने की रणनीति भी बनाई जा सकती है।
फिलहाल माखननगर तहसील कार्यालय के सामने धरना लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों से बातचीत और उनकी मांगों के समाधान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर है। वहीं आदिवासी संगठनों के बढ़ते समर्थन के बाद आंदोलन के आगे और बड़ा रूप लेने की संभावना बनी हुई है।

