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Jabalpur होशंगाबाद रेलवे स्टेशन में हाईमास्क लाइट के लिए काटे पेड़

hm

रेलवे स्टेशन परिसर में पेड़ों की हरियाली को रेलवे के अधिकारी ने इसलिए उजाड़ा कि यहां रात में हाईमास्क लाइट की रोशनी नहीं रहती थी। भोपाल मंडल के होशंगाबाद रेलवे परिसर में छायादार पेड़ों को काटा गया। हाईमास्क के उजाले में स्टेशन की बिल्डिंग और परिसर अच्छा दिखे इसलिए IOW असिस्टेंट इंचार्ज ने बगैर परमिशन और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अधूरी भ्रमित जानकारी देकर 9 हरे-भरे स्वमूल के पेड़ों को कटवाया गया है।

इन पेड़ों को काटने का ठेका भी इटारसी के अपने परिचित ठेकेदार को दिया गया। पिछले दो दिनों में रेलवे स्टेशन के बाहरी हिस्से में लगे  साथ ही इन लकड़ियों को बेचने का सौदा भी उसी ठेकेदार से किया। जिसे ट्रॉली में भरकर इटारसी पहुंचाया गया। हरे-भरे पेड़ों को कटता देख गुजर रहे यात्री और कुछ ऑटो चालकों में रेलवे के अधिकारयों के प्रति गुस्सा है। होशंगाबाद रेलवे प्रबंधन हरियाली लगाने के बजाय हरियाली उजाड़ने में लगा है।

केवल दो पेड़ कटे, बाकी की छंटनी हुई, हकीकत : 9 पेड़ कटे स्टेशन पर पेड़ कटाई के मामले में IOW अंकुर चौधरी की बातों से विरोधाभाष हो रहा। उन्होंने कहा कि केवल 2 पेड़ कटे, बाकी की छंठनी हुई है। जो हाईमास्क लाइट के उजाले में दिक्कत दे रहे थे, जबकि हकीकत में ठेकेदार ने 9 से 10 पेड़ों को कटवाया है। इस लकड़ियों को वो ट्रॉली में भरकर इटारसी भिजवा दी। साथ ही आईओडब्ल्यू असिस्टेंट ने कहा इन पेड़ों को काटने की परमिशन नहीं लगती। अपने अधिकारियों को बताकर पेड़ की कटाई और छंटनी कराई।

ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगरपालिका या नगरनिगम से परमिशन लेना हाेता है।  रेलवे स्टेशन परिसर में लगे हरे पेड़ों काटा गया। ढूंढ शेष बचे है। नपा, ननि से लेनी होती परमिशन, लकड़ी डिपो में जमा होती वन विभाग के रेंजर हरगोविंद मिश्रा ने बताया कि हरे पेड़ों की काटने की परमिशन दो जगह से मिलती है। इसके अलावा वन भूमि पर कीमती लकड़ी के पेड़ों की परमिशन वन विभाग व राजस्व से होती है। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा रेलवे क्षेत्र से लकड़ी कटी है तो उसे डिपो में जमाना कराना होता है। बेचना या किसी को देना गलत है।

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