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UPI चार्ज के विरोध में व्यापारियों का ‘नो-UPI डे’, वीडियो में जाने MP के कई शहरों में 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट लेने से इनकार; QR स्कैनर पर बांधा काला कपड़ा

UPI चार्ज के विरोध में व्यापारियों का ‘नो-UPI डे’, वीडियो में जाने MP के कई शहरों में 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट लेने से इनकार; QR स्कैनर पर बांधा काला कपड़ा

मध्य प्रदेश में बुधवार को व्यापारियों ने प्रस्तावित UPI चार्ज के विरोध में ‘नो-UPI डे’ मनाया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में व्यापारियों ने 2 हजार रुपये से अधिक के UPI पेमेंट स्वीकार करने से इनकार कर विरोध जताया। इस दौरान दुकानों पर लगे QR स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काला कपड़ा बांधा गया। कुछ जगहों पर UPI का प्रतीकात्मक पुतला भी लटकाया गया। व्यापारियों ने प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और सरकार से इसे वापस लेने की मांग उठाई।

QR स्कैनर और साउंड बॉक्स पर बांधा काला कपड़ा

UPI चार्ज के विरोध में व्यापारियों ने अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन किया। कई दुकानों पर डिजिटल पेमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले QR स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढक दिया गया। इसके जरिए व्यापारियों ने प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया।व्यापारियों का कहना है कि UPI डिजिटल भुगतान की व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ग्राहक और कारोबारी करते हैं। ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर कारोबार पर पड़ सकता है।

भोपाल चेंबर ने शुल्क को बताया अनुचित

भोपाल चेंबर के प्रवक्ता अजय देवनानी ने प्रस्तावित UPI शुल्क पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि UPI पर लगाया जा रहा शुल्क जायज नहीं है। व्यापारियों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है।वहीं, अहिल्या चेंबर के सदस्य कैलाश चंद्र खंडेलवाल ने सरकार पर हिडन एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। व्यापारिक संगठनों ने प्रस्तावित शुल्क के प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

सराफा कारोबारियों ने महंगाई बढ़ने की जताई आशंका

भोपाल के सराफा कारोबारियों ने भी UPI चार्ज का विरोध किया। उनका कहना है कि प्रस्तावित शुल्क के कारण करीब 2 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ सकती है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, महंगाई में वास्तविक बढ़ोतरी कारोबार की लागत, शुल्क की वसूली और उसे ग्राहकों तक पहुंचाने के तरीके पर निर्भर करेगी।व्यापारियों का तर्क है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आती है, तो इसका असर उनके मुनाफे और ग्राहकों को मिलने वाली कीमतों पर पड़ सकता है।

15 अक्टूबर से प्रस्तावित है UPI चार्ज

व्यापारियों के विरोध की मुख्य वजह 15 अक्टूबर से प्रस्तावित UPI चार्ज है। दी गई जानकारी के अनुसार, 2 हजार रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) प्रस्तावित है।इसके तहत 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक होने की बात कही गई है। इसी प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि शुल्क लागू होने से डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।‘नो-UPI डे’ के जरिए व्यापारियों ने प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ सामूहिक विरोध दर्ज कराया। अब इस मुद्दे पर सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच आगे की चर्चा महत्वपूर्ण होगी।

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