बांधवगढ़ से कटनी की ओर बढ़ रहा 'टाइगर मूवमेंट', जंगलों में 14 बाघों की मौजूदगी; वन विभाग अलर्ट
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के जंगल अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकलने वाले युवा बाघों की नई पनाहगाह बनते जा रहे हैं। वन विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में वर्तमान में 14 बाघों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई है। बाघों की बढ़ती संख्या ने जहां वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं, वहीं वन विभाग की जिम्मेदारियां भी बढ़ा दी हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के बाद युवा बाघ नए क्षेत्र और अपना अलग टेरिटरी तलाशने के लिए आसपास के जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण कटनी के वन क्षेत्रों में उनकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
कटनी बन रहा बाघों का नया ठिकाना
कटनी जिले के जंगल घने वन, पर्याप्त शिकार और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण के कारण बाघों के लिए उपयुक्त आवास साबित हो रहे हैं। वन विभाग की निगरानी में कई इलाकों में बाघों की नियमित आवाजाही दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप, पगमार्क और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उनकी मौजूदगी की पुष्टि की जा रही है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। वनकर्मियों को लगातार अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाघों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को भी रोका जा सके।अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। जंगल से लगे गांवों के निवासियों को बाघ दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने और स्वयं किसी तरह का जोखिम न उठाने की सलाह दी जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि कटनी के जंगलों में बाघों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश में बेहतर वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन का संकेत है। यदि बाघ सुरक्षित महसूस करते हैं और नए क्षेत्रों में अपना आवास बना रहे हैं, तो यह जंगलों के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को भी दर्शाता है।हालांकि, इसके साथ वन विभाग के सामने बाघों के सुरक्षित आवागमन, उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की चुनौती भी बढ़ गई है।
संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
वन विभाग का कहना है कि आने वाले समय में बाघों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। साथ ही वन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि कटनी के जंगल बाघों के लिए सुरक्षित आवास बने रहें और वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिल सके।

