आधे MP में आज आंधी-बारिश का अलर्ट: इंदौर-उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल में रावण के पुतलों को ढका
मध्यप्रदेश में दशहरा पर्व के दिन मौसम का मिजाज बिगड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने प्रदेश के करीब आधे हिस्से में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए दशहरा उत्सव समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजधानी भोपाल में बारिश से बचाने के लिए रावण के पुतलों को ढक दिया गया है।
25 जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के छह संभागों के जिलों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग शामिल हैं। मौसम में बदलाव के कारण दशहरा के कार्यक्रमों पर असर पड़ने की आशंका है।
प्रदेश के कई शहरों में दशहरा के अवसर पर रावण दहन के साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में बारिश और तेज हवाओं को लेकर आयोजकों की चिंता बढ़ गई है।
भोपाल में रावण के पुतलों को ढका
बारिश की आशंका को देखते हुए भोपाल में रावण के पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ढक दिया गया है। आयोजकों की कोशिश है कि बारिश के कारण पुतलों को नुकसान न पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के दौरान रावण दहन में परेशानी न हो।
खुले मैदानों में रखे पुतलों पर बारिश का असर पड़ सकता है। तेज हवा से पुतलों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी वजह से उत्सव समितियां मौसम को ध्यान में रखकर व्यवस्थाएं कर रही हैं।
दशहरा आयोजनों पर मौसम की नजर
दशहरा पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों से निकलते हैं। बारिश होने पर आयोजन स्थलों पर कीचड़, यातायात और लोगों की आवाजाही से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आयोजकों को दर्शकों की सुरक्षा और सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा।
मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों को सलाह दी जाती है कि वे घर से निकलने से पहले अपने शहर का मौसम अपडेट देख लें। आंधी के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और अस्थायी ढांचों के पास खड़े होने से बचना चाहिए।
फिलहाल मध्यप्रदेश के 25 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना के चलते दशहरा उत्सव की तैयारियों पर मौसम का असर दिखाई देने लगा है। भोपाल में रावण के पुतलों को ढकना इसी सतर्कता का हिस्सा है। अब कार्यक्रमों के दौरान मौसम कैसा रहता है, इस पर आयोजकों और श्रद्धालुओं की नजर रहेगी।

