Samachar Nama
×

‘यह हादसा नहीं, हत्या है’, वीडियो में देखें क्रूज त्रासदी पर फूटा गुस्सा, टूरिज्म विभाग पर उठे सवाल

‘यह हादसा नहीं, हत्या है’, वीडियो में देखें क्रूज त्रासदी पर फूटा गुस्सा, टूरिज्म विभाग पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर अब पीड़ित परिवारों और उनके करीबियों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। इस हादसे में जान गंवाने वाले कामराज के दोस्त और सहकर्मी ने इसे हादसा मानने से इनकार करते हुए इसे सीधा “मर्डर” करार दिया है। उन्होंने एमपी टूरिज्म डिपार्टमेंट को इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आक्रोशित सहकर्मी ने कहा, “यह कोई एक्सीडेंट नहीं है, यह मर्डर है। हमें किसी तरह की राहत या मुआवजा नहीं चाहिए, हमें सिर्फ न्याय चाहिए।” उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक इस मामले में कितने अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है और कितनों को निलंबित किया गया है। साथ ही उन्होंने बोट ऑपरेटर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा, “बोट ऑपरेटर कहां है? उसे अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह न्याय अधूरा रहेगा।” उनके इस बयान ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई, जो अपने आप में बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना है। उनका आरोप है कि अगर सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

कामराज के सहकर्मी ने यह भी कहा कि आर्थिक सहायता इस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि कामराज की मासिक सैलरी करीब एक लाख रुपये थी और वह अपने परिवार का मुख्य सहारा थे। ऐसे में मुआवजा राशि से इस क्षति की भरपाई संभव नहीं है।

इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजन और स्थानीय लोग लगातार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों को सजा नहीं मिलती, तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी रहेगी।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि सिर्फ जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

यह मामला अब केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जवाबदेही और सिस्टम की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस बढ़ते जनआक्रोश के बीच क्या कदम उठाते हैं।

Share this story

Tags