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बिहार के गोपालगंज जिले के करीब 10 मजदूरों को मध्य प्रदेश के रतलाम में बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। मजदूरों ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन्हें काम दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश ले जाया गया और वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर एक लाख रुपये में कंपनी को सौंप दिया गया। मजदूरों ने बिहार सरकार और प्रशासन से सुरक्षित घर वापसी की गुहार लगाई है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने भी मजदूरों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें वापस लाने की पहल शुरू कर दी है।
मजदूरों के मुताबिक, वे गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर और मांझागढ़ इलाके के रहने वाले हैं। उनका आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने उन्हें दूसरे राज्य में बेहतर रोजगार और मजदूरी दिलाने का भरोसा दिया था। उन्हें पहले उत्तर प्रदेश के झांसी में काम दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन यात्रा के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के रतलाम पहुंचा दिया गया।
आठ घंटे काम का वादा, 12 घंटे काम कराने का आरोप
मजदूरों का कहना है कि उन्हें रोजाना करीब आठ घंटे काम करने और तय मजदूरी मिलने की बात कही गई थी। लेकिन रतलाम पहुंचने के बाद उनसे कथित तौर पर करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है। मजदूरों ने पर्याप्त खाना और जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे अपनी इच्छा से घर वापस नहीं लौट पा रहे हैं।
मजदूरों ने वीडियो में बताया कि वे रतलाम के एक सुनसान इलाके में जंगल के बीच लकड़ी के बने कमरे में रह रहे हैं। उनका दावा है कि आसपास का इलाका काफी अलग-थलग है और उन्हें डर के माहौल में रहना पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने वीडियो बनाकर प्रशासन और सरकार से मदद मांगी।
एक लाख रुपये में सौंपने का आरोप
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कंपनी को करीब एक लाख रुपये में सौंप दिया गया। एक अन्य शिकायत के मुताबिक, उन्हें घर वापस जाने के लिए कथित तौर पर पहले यह रकम लौटाने की बात कही जा रही है। मजदूरों का कहना है कि उनके पास इतनी रकम नहीं है, इसलिए वे वहां फंसे हुए हैं।
प्रशासन ने शुरू की घर वापसी की पहल
मामला सामने आने के बाद बिहार भवन, नई दिल्ली के संयुक्त श्रम आयुक्त कुमार दिग्विजय ने रतलाम के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मजदूरों की स्थिति की तत्काल जानकारी लेने का अनुरोध किया है। पत्र में जरूरत पड़ने पर मजदूरों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित बिहार वापस भेजने की कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही उनकी सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखने का भी अनुरोध किया गया है।
प्रशासन अब मजदूरों से संपर्क स्थापित करने और उनकी शिकायतों की वास्तविक स्थिति की जांच करने में जुटा है। साथ ही उन्हें मध्य प्रदेश ले जाने वाले कथित ठेकेदार और संबंधित कंपनी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल मजदूरों के लगाए आरोपों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। परिजन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सभी मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से घर वापस लाया जाए।

