62 साल पुराने स्कूल भवन की छत बल्लियों और पाइप के सहारे टिकी, कभी भी हो सकता है हादसा; पहली मंजिल तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं
ईसागढ़ ब्लॉक के बमनावर माध्यमिक स्कूल की जर्जर इमारत विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए खतरा बनी हुई है। करीब 62 साल पुराने इस भवन की छत पत्थर की फर्शियां चटकने के कारण कमजोर हो चुकी है। छत को गिरने से बचाने के लिए बल्लियों और पाइप का सहारा दिया गया है। इसके बावजूद स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
स्कूल की इमारत की हालत लंबे समय से खराब बताई जा रही है। छत की पत्थर की फर्शियों में दरारें आने और उनके चटकने के कारण भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। छत को सहारा देने के लिए जगह-जगह बल्लियां और पाइप लगाए गए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों को हर दिन इसी भवन में समय बिताना पड़ रहा है।
6 लाख रुपए खर्च कर बनाए दो कमरे, लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं
इस स्कूल भवन की पहली मंजिल पर करीब 14 साल पहले लगभग 6 लाख रुपए की लागत से दो कमरे बनवाए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इन कमरों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां या रैंप तक नहीं बनाया गया। इसके कारण पहली मंजिल पर बनाए गए कमरों का उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है।
स्कूल में बुनियादी सुविधाओं और भवन की सुरक्षा से जुड़े सवाल अब उठने लगे हैं। एक तरफ पुरानी इमारत की छत को बल्लियों और पाइप के सहारे टिकाया गया है, वहीं दूसरी तरफ पहली मंजिल पर कमरे बनाने के बावजूद वहां पहुंचने की व्यवस्था नहीं की गई।
विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल
स्कूल भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। छत की फर्शियां चटकने के कारण किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में भवन की तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत की जरूरत है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि 62 साल पुरानी इमारत की मरम्मत और सुरक्षा के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। वहीं, पहली मंजिल पर कमरों के निर्माण के दौरान सीढ़ियां या रैंप नहीं बनाए जाने का कारण भी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल भवन की सुरक्षा और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित कक्षाओं की व्यवस्था करना जरूरी है।

