बिजली विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों की दर्दनाक कहानी: करंट से किसी ने हाथ गंवाया, किसी ने लाखों का इलाज कराया
बिजली विभाग में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों की जिंदगी हर दिन जोखिम से भरी रहती है। ये कर्मचारी लोगों के घरों तक रोशनी पहुंचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर काम करते हैं, लेकिन कई बार हादसों के बाद इन्हें पर्याप्त आर्थिक मदद और सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिल पाती। मध्यप्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कर्मचारियों ने करंट की चपेट में आकर अपना शरीर का हिस्सा खो दिया या महीनों तक अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ा।
एक कर्मचारी का दायां हाथ बिजली के तेज करंट की चपेट में आने के बाद हमेशा के लिए बेकार हो गया। वहीं, दूसरे कर्मचारी की पीठ, कंधे और हाथ इतनी बुरी तरह झुलस गए कि उसे कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। हादसों के बाद इलाज का खर्च भी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
इलाज के लिए साथियों और परिवार ने उठाया खर्च
हादसे के शिकार कई आउटसोर्स कर्मचारियों को इलाज के लिए खुद आर्थिक इंतजाम करना पड़ा। किसी ने डेढ़ लाख रुपए तक इलाज में खर्च किए, तो किसी कर्मचारी के इलाज पर आठ से दस लाख रुपए तक खर्च हो गए। इन खर्चों को पूरा करने के लिए कई कर्मचारियों के साथियों ने चंदा जुटाया, जबकि कई परिवारों को कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कर्मचारियों का कहना है कि जिस विभाग के लिए वे अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, वहां से उन्हें हादसों के बाद अपेक्षित सहायता नहीं मिलती। दुर्घटना के बाद परिवार आर्थिक संकट में फंस जाता है और इलाज का बोझ भी उठाना पड़ता है।
जान जोखिम में डालकर करते हैं काम
बिजली विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी रोजाना बिजली लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और फीडरों पर काम करते हैं। कई बार उन्हें खराब मौसम, ऊंचाई और तेज वोल्टेज वाले उपकरणों के बीच काम करना पड़ता है। कर्मचारियों का आरोप है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी और काम के दबाव के कारण हादसों का खतरा बना रहता है।
इन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं, जबकि काम का जोखिम लगभग समान होता है। दुर्घटना की स्थिति में परिवारों को आर्थिक सहायता और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
सुरक्षा और मुआवजे की मांग
आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार और बिजली कंपनियों से मांग की है कि काम के दौरान सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही हादसों में घायल होने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए।
बिजली विभाग में काम करने वाले ये कर्मचारी रोजाना हजारों लोगों के घरों को रोशन करते हैं, लेकिन खुद उनकी जिंदगी अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। करंट से झुलसे और अपंग हुए कर्मचारियों की कहानियां बताती हैं कि सुरक्षा और सम्मान दोनों की जरूरत है।

