अफसरों को पता था क्रूज में गडबडी, फिर भी नहीं रूके, लिखा था दोनों इंजन बदलना चाहिए, वीडियो में समझें 13 लोगों की मौत का पूरा सच
मध्य प्रदेश के जबलपुर में 30 अप्रैल को हुए बरगी क्रूज हादसे को लेकर अब बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। इस हादसे में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की गंभीर चूक उजागर होने के बाद जांच पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना के 13 दिन बाद सामने आए एक आधिकारिक पत्र में खुलासा हुआ है कि मैकल रिसोर्ट की ओर से 1 मार्च को ही निगम को सूचित कर दिया गया था कि क्रूज संचालन के लायक नहीं है। इसके बावजूद क्रूज को बंद नहीं किया गया और लगातार संचालन जारी रखा गया।
पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि क्रूज में तकनीकी खामियां हैं और वह पानी में उतारने योग्य नहीं है। इसके बावजूद पर्यटकों को उसी क्रूज में बैठाकर डैम में उतारा गया, जिससे यह भयावह हादसा हुआ जिसमें 13 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, रेव क्रूज बोट 14 जनवरी 2025 को राउंड के दौरान ही गंभीर तकनीकी खराबी का शिकार हो गई थी। उस समय दोनों इंजन अचानक बंद हो गए थे, जिससे संचालन पर गंभीर सवाल उठे थे।
इसके बाद हैदराबाद की बोट बनाने वाली कंपनी ने ईमेल के माध्यम से स्पष्ट किया था कि क्रूज के इंजन काफी पुराने हो चुके हैं और अब उनकी मरम्मत संभव नहीं है क्योंकि स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं हो रहे। कंपनी ने सलाह दी थी कि दोनों इंजन पूरी तरह बदल दिए जाएं।
इसके बावजूद क्रूज संचालन जारी रखा गया और सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया गया। अब इस लापरवाही को ही हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। हादसे के दौरान अचानक खराब मौसम और तकनीकी असंतुलन के कारण क्रूज डैम में पलट गया। यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग पानी में फंस गए। रेस्क्यू टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पहले दी गई चेतावनियों पर ध्यान दिया जाता तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है। फिलहाल पूरा मामला पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

