कमजोर मानसून का दिखने लगा असर, जुलाई बनी चार साल की सबसे गर्म; पेयजल संकट और बीमारियों की बढ़ी चिंता
प्रदेश में जुलाई के दौरान कमजोर मानसून का असर अब मौसम के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति और लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सामान्य से कम बारिश और लगातार गर्मी के कारण जल स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है, जबकि उमस और तापमान में वृद्धि से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। मौसम के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद इस साल जुलाई सबसे अधिक गर्म दर्ज की गई है।
चार साल में सबसे गर्म जुलाई
मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में जुलाई का अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं इस वर्ष जुलाई में अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले चार वर्षों में जुलाई का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है।
आमतौर पर जुलाई में मानसून सक्रिय रहने से तापमान में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण गर्मी और उमस दोनों ने लोगों को परेशान किया।
पेयजल आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
कम बारिश के चलते जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर पर असर पड़ने लगा है। कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। जल स्रोतों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंचने से जल प्रबंधन एजेंसियों की चिंता भी बढ़ी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कई इलाकों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
उमस और गर्मी से बढ़ीं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
लगातार गर्मी और उमस का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, वायरल संक्रमण, बुखार, थकान और गर्मी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है।
किसानों की भी बढ़ी चिंता
कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। जिन इलाकों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां खरीफ फसलों की बुवाई और फसल की बढ़वार प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। किसान अब मानसून के अगले दौर का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग की नजर अगले सिस्टम पर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है, तो तापमान में गिरावट आने के साथ-साथ जल संकट की स्थिति में भी सुधार हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कमजोर मानसून ने इस बार जुलाई के मौसम का सामान्य स्वरूप बदल दिया है। बढ़ती गर्मी, जल संकट की आशंका और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें मानसून के अगले दौर और अच्छी बारिश की उम्मीद पर टिकी हैं।

