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ई-कॉमर्स कंपनी ने नहीं दिया जवाब, अब 7 फीसदी ब्याज के साथ पूरी रकम लौटाने का आदेश

ई-कॉमर्स कंपनी ने नहीं दिया जवाब, अब 7 फीसदी ब्याज के साथ पूरी रकम लौटाने का आदेश

ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े एक मामले में ई-कॉमर्स कंपनी को उपभोक्ता को पूरी रकम लौटानी पड़ सकती है। मामले में कंपनी की ओर से जवाब नहीं दिए जाने के बाद उपभोक्ता विवाद से जुड़े प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। आदेश के अनुसार निर्धारित अवधि में रकम वापस नहीं करने पर कंपनी को 7 फीसदी ब्याज के साथ पूरी राशि लौटानी होगी।

मामला ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ा बताया जा रहा है। उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामान खरीदा था, लेकिन लेनदेन के बाद सामने आई समस्या को लेकर कंपनी से संपर्क किया गया। उपभोक्ता की ओर से शिकायत दर्ज कराने और समाधान की मांग के बावजूद कंपनी की तरफ से अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।

सुनवाई के दौरान कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। हालांकि, आरोप है कि कंपनी की ओर से मामले में उचित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए तथ्यों के आधार पर मामले पर विचार किया।

आयोग ने उपभोक्ता के हित को ध्यान में रखते हुए कंपनी को संबंधित रकम वापस करने के निर्देश दिए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि निर्धारित समय सीमा में राशि वापस नहीं की जाती है तो कंपनी को 7 फीसदी ब्याज के साथ पूरी रकम लौटानी होगी। इससे उपभोक्ता को समय पर राहत नहीं मिलने की स्थिति में अतिरिक्त आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।

यह मामला ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ई-कॉमर्स कंपनियों से सामान खरीदते समय भुगतान की रसीद, ऑर्डर डिटेल, बिल, कंपनी के साथ हुई बातचीत और शिकायत से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी होता है। किसी विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज शिकायत के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन के बीच ग्राहकों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच विवाद के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में उपभोक्ता को शिकायत का समाधान नहीं मिलने पर संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने का अधिकार है।

फिलहाल इस मामले में कंपनी को पूरी रकम वापस करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही भुगतान में देरी होने पर 7 फीसदी ब्याज का प्रावधान रखा गया है। यह आदेश उपभोक्ता अधिकारों और ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

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