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सिंहस्थ के लिए 1352 करोड़ में बना देवास-बदनावर हाईवे सवालों के घेरे में, तपोभूमि चौराहे पर उल्टी दिशा में चल रहे वाहन

सिंहस्थ के लिए 1352 करोड़ में बना देवास-बदनावर हाईवे सवालों के घेरे में, तपोभूमि चौराहे पर उल्टी दिशा में चल रहे वाहन

मध्य प्रदेश में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच 1352 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए देवास-बदनावर हाईवे पर यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों और इंजीनियरों की लापरवाही के कारण देवास से उज्जैन आने वाले वाहन चालकों को तपोभूमि चौराहे पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां वाहन चालकों को इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन की सर्विस रोड पर उल्टी दिशा में चलकर ब्रिज के नीचे से गुजरना पड़ रहा है।

तपोभूमि चौराहे पर वाहन चालकों की परेशानी

देवास से उज्जैन की ओर आने वाले वाहनों के लिए तपोभूमि चौराहे पर यातायात व्यवस्था चुनौती बन रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वाहन चालकों को निर्धारित दिशा में आगे बढ़ने के बजाय सर्विस रोड पर उल्टी दिशा में जाना पड़ता है। इसके बाद वे ब्रिज के नीचे से गुजरकर आगे का रास्ता पकड़ते हैं।

इस व्यवस्था से वाहन चालकों को असुविधा होने के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। खासकर जब यातायात का दबाव अधिक हो, तब विपरीत दिशा में वाहनों की आवाजाही स्थिति को और मुश्किल बना सकती है।

सिंहस्थ के दौरान बढ़ सकती है समस्या

उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में शहर और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। तपोभूमि चौराहे पर मौजूदा व्यवस्था बनी रहने पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने और जाम लगने की आशंका है।

देवास-बदनावर हाईवे को सिंहस्थ के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ऐसे में इस मार्ग पर यातायात का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।

यातायात व्यवस्था में सुधार की जरूरत

हाईवे पर सामने आ रही इस समस्या को देखते हुए संबंधित अधिकारियों के लिए चौराहे की यातायात व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है। वाहन चालकों को सही दिशा में सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने और उल्टी दिशा में आवाजाही रोकने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने चाहिए।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में NHAI की आधिकारिक प्रतिक्रिया, समस्या के समाधान की समयसीमा और प्रस्तावित सुधारों का विवरण नहीं है। सिंहस्थ से पहले इस व्यवस्था में सुधार होता है या नहीं, इस पर निगाह रहेगी।

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