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केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों का 'चिता आंदोलन' खत्म, 17वें दिन प्रशासन ने हटाया; अनशन अब भी जारी

केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों का 'चिता आंदोलन' खत्म, 17वें दिन प्रशासन ने हटाया; अनशन अब भी जारी

केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों का 'चिता आंदोलन' 17वें दिन समाप्त हो गया। रविवार को प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को बलपूर्वक धरना स्थल से हटा दिया। हालांकि, प्रभावितों ने स्पष्ट किया है कि उनका अनिश्चितकालीन अनशन अभी जारी रहेगा और वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।

17 दिनों से जारी था आंदोलन

परियोजना से प्रभावित ग्रामीण पिछले 17 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान उन्होंने विरोध के प्रतीक के रूप में 'चिता आंदोलन' शुरू किया था, जिससे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा सके।

प्रभावितों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा, पुनर्वास और अन्य मांगों पर अब तक संतोषजनक समाधान नहीं मिला है।

प्रशासन ने हटाया धरना स्थल

रविवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में आंदोलन स्थल पर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने आंदोलनकारियों को धरना स्थल से हटाते हुए 'चिता आंदोलन' समाप्त करा दिया।

कार्रवाई के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

अनशन रहेगा जारी

हालांकि 'चिता आंदोलन' समाप्त हो गया है, लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ किया कि उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

प्रभावितों ने सरकार से वार्ता कर समाधान निकालने की मांग दोहराई है।

केन-बेतवा परियोजना से जुड़े हैं कई गांव

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के तहत कई गांवों और परिवारों के विस्थापन तथा पुनर्वास का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। प्रभावित ग्रामीण उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज की मांग कर रहे हैं।

समाधान की उम्मीद

प्रशासन का कहना है कि प्रभावितों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमानुसार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और प्रभावितों के बीच वार्ता कब होती है और इस लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।

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