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सस्पेंड उपयंत्री का बड़ा आरोप: ‘जनपद से भोपाल तक चलता है कमीशन का सिस्टम’, सतना में मचा हड़कंप

सस्पेंड उपयंत्री का बड़ा आरोप: ‘जनपद से भोपाल तक चलता है कमीशन का सिस्टम’, सतना में मचा हड़कंप

मध्यप्रदेश के सतना जिले में वित्तीय अनियमितताओं समेत कई शिकायतों के बाद निलंबित किए गए मझगवां जनपद पंचायत के संविदा उपयंत्री सतीश समेले गुरुवार को पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जनपद पंचायत से लेकर भोपाल स्तर तक कमीशन का पूरा सिस्टम चलता है।

सतीश समेले ने मीडिया से बातचीत के दौरान कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में होने वाले भुगतान से लेकर अन्य प्रक्रियाओं तक में एक तय व्यवस्था के तहत कमीशन लिया जाता है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में क्या-क्या साक्ष्य हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।

गौरतलब है कि सतीश समेले को वित्तीय अनियमितताओं सहित कई शिकायतों के बाद निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर जांच प्रक्रिया भी चल रही है। निलंबन के बाद दिए गए उनके बयान ने अब मामले को और चर्चा में ला दिया है।

उपयंत्री ने कहा कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और यदि निष्पक्ष जांच होती है तो पूरी व्यवस्था की सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।

वहीं, उनके आरोपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास भ्रष्टाचार या अनियमितताओं से जुड़े ठोस तथ्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले में अब सभी की नजर विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच के दौरान उपयंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

सतना जिले में इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि सतीश समेले के आरोपों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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