सतना में 10 दिन से बंद उपस्वास्थ्य केंद्र, पांच गांवों के ग्रामीण इलाज के लिए परेशान
मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। कोटर तहसील के अंतर्गत आने वाला मोहनिया उपस्वास्थ्य केंद्र पिछले 10 दिनों से बंद पड़ा है। केंद्र में ताला लगा होने के कारण मोहनिया, बूड़ा और अधरवार सहित करीब पांच गांवों के ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण छोटी-मोटी बीमारी या चोट लगने पर भी उन्हें दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है।
स्टाफ के तबादले के बाद बंद हुआ केंद्र
बताया जा रहा है कि मोहनिया उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्वास्थ्य कर्मचारियों के तबादले के बाद नई पदस्थापना नहीं की गई। स्टाफ के स्थानांतरण के बाद केंद्र में कोई नया कर्मचारी नहीं भेजा गया, जिसके चलते पिछले करीब 10 दिनों से स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगा हुआ है।
ग्रामीणों के मुताबिक उपस्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से आसपास के गांवों के लिए प्राथमिक इलाज का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। सामान्य बुखार, चोट, मौसमी बीमारियों और अन्य छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को यहीं प्रारंभिक उपचार मिल जाता था।
पांच गांवों के लोगों की बढ़ी परेशानी
मोहनिया के अलावा बूड़ा और अधरवार सहित पांच गांवों के ग्रामीण इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। केंद्र बंद होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है। कई बार आपात स्थिति में मरीजों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में रास्तों की स्थिति भी खराब हो जाती है। ऐसे में मरीजों को दूसरे स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना और भी मुश्किल हो जाता है।
नई पदस्थापना की मांग
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मोहनिया उपस्वास्थ्य केंद्र में जल्द से जल्द कर्मचारियों की पदस्थापना की जाए और स्वास्थ्य सेवाएं बहाल की जाएं। उनका कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण आबादी को उनके आसपास ही प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है। ऐसे में केंद्र का कई दिनों तक बंद रहना ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते कर्मचारी तैनात नहीं किए तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल
उपस्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ के तबादले के बाद नई पदस्थापना नहीं होने से विभाग की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का विषय है।
ग्रामीणों की मांग है कि जब तक नियमित स्टाफ की नियुक्ति नहीं होती, तब तक वैकल्पिक कर्मचारी की व्यवस्था की जाए, ताकि पांच गांवों के लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए भटकना न पड़े।
फिलहाल मोहनिया उपस्वास्थ्य केंद्र पिछले 10 दिनों से बंद है और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग कब तक यहां नई पदस्थापना कर केंद्र का ताला खुलवाता है।

