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दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर सख्त कार्रवाई, साधु समाज से बहिष्कार, वीडियो में जाने धार्मिक आयोजनों में प्रवेश पर रोक

दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर सख्त कार्रवाई, साधु समाज से बहिष्कार, वीडियो में जाने धार्मिक आयोजनों में प्रवेश पर रोक

उज्जैन में दुष्कर्म के आरोपी निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। महाकाल थाना पुलिस द्वारा महिला की शिकायत पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद स्थानीय अखाड़ा परिषद ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें साधु समाज से बहिष्कृत कर दिया है। इसके साथ ही परिषद ने उज्जैन के मठों, आश्रमों और अखाड़ों में आयोजित होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रमों में उनके प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। स्थानीय अखाड़ा परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। परिषद का कहना है कि इस तरह के गंभीर आरोप संत समाज की गरिमा और प्रतिष्ठा के खिलाफ हैं।

परिषद ने निर्मोही अखाड़े से पद हटाने की मांग की

अखाड़ा परिषद ने निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज को पत्र भेजकर ज्ञानदास को महामंडलेश्वर पद से तत्काल हटाने की मांग की है। परिषद का मानना है कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति का इतने महत्वपूर्ण धार्मिक पद पर बने रहना उचित नहीं है।अब यह फैसला निर्मोही अखाड़े के नेतृत्व पर निर्भर करेगा कि वह इस संबंध में आगे क्या कदम उठाता है।

महिला की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, महाकाल थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत के आधार पर ज्ञानदास के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। इसी के बाद स्थानीय अखाड़ा परिषद ने आपात बैठक बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा की।बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से ज्ञानदास के बहिष्कार और धार्मिक आयोजनों में प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।

संत समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की बात

स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज और महामंत्री महंत रामेश्वर गिरी महाराज ने कहा कि महिला के साथ दुष्कर्म का आरोप बेहद गंभीर है और इस प्रकार की घटना संत समाज की गरिमा के अनुरूप नहीं है।उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से समाज में संतों की छवि प्रभावित होती है और आम लोगों की धार्मिक संस्थाओं के प्रति आस्था को भी ठेस पहुंचती है। इसी कारण परिषद ने सख्त रुख अपनाते हुए यह निर्णय लिया है।

अब धार्मिक आयोजनों में नहीं हो सकेंगे शामिल

परिषद के फैसले के बाद ज्ञानदास अब स्थानीय अखाड़ा परिषद के अधीन आने वाले किसी भी मठ, आश्रम, अखाड़े या धार्मिक आयोजन में भाग नहीं ले सकेंगे। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। फिलहाल मामले की जांच पुलिस स्तर पर जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा। वहीं, अखाड़ा परिषद की कार्रवाई को साधु समाज की अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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