नर्मदापुरम के स्कूल में अजीब हालात: बाहर 5G टॉवर, मोबाइल में फुल सिग्नल; शिक्षा विभाग की फाइलों में ‘जीरो नेटवर्क’
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के एक सरकारी स्कूल में नेटवर्क को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भावंदा गांव के मिडिल स्कूल की बाउंड्री से कुछ ही दूरी पर 5G मोबाइल टॉवर मौजूद है। मौके पर मोबाइल की स्क्रीन पर बीएसएनएल और जियो के फुल सिग्नल दिखाई देते हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की रिकॉर्ड फाइलों में यही स्कूल ‘जीरो नेटवर्क’ वाले स्कूलों की सूची में दर्ज है।इस विरोधाभास ने विभागीय सर्वे और जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल के पास खड़ा है 5G टॉवर
भावंदा गांव के मिडिल स्कूल के आसपास मोबाइल नेटवर्क की स्थिति देखने पर अलग तस्वीर सामने आती है। स्कूल की बाउंड्री के पास ही 5G टॉवर लगा हुआ है।स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल परिसर और आसपास के इलाके में मोबाइल नेटवर्क आसानी से उपलब्ध है। मोबाइल फोन में बीएसएनएल और जियो कंपनियों के सिग्नल भी दिखाई देते हैं।इसके बावजूद शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में स्कूल को नेटवर्क विहीन बताया गया है।
फाइलों में दर्ज है नेटवर्क की समस्या
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई सूची में कई स्कूलों को नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्र में शामिल किया गया है। इसी सूची में भावंदा गांव का मिडिल स्कूल भी शामिल बताया जा रहा है।अब सवाल उठ रहा है कि जब स्कूल के पास मोबाइल टॉवर मौजूद है और नेटवर्क उपलब्ध है, तो फिर इसे जीरो नेटवर्क वाली श्रेणी में कैसे रखा गया।
ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कामों पर असर
आज के समय में स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल उपस्थिति, सरकारी पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने और अन्य विभागीय कार्यों के लिए इंटरनेट की जरूरत बढ़ गई है।अगर किसी स्कूल को वास्तव में नेटवर्क की समस्या हो तो इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को परेशानी होती है। लेकिन भावंदा स्कूल के मामले में जमीनी स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर दिखाई दे रहा है।
सर्वे पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के सर्वे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों की नेटवर्क स्थिति का आकलन मौके पर जाकर किया जाना चाहिए, ताकि सही जानकारी सामने आ सके।वहीं, अधिकारियों से इस मामले में जांच कर रिकॉर्ड में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।फिलहाल भावंदा गांव का यह स्कूल चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ मोबाइल स्क्रीन पर 5G सिग्नल नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी फाइलों में नेटवर्क का ‘सन्नाटा’ दर्ज है।

