उफनती चंबल में 64 यात्रियों के साथ 5 किमी तक बहता रहा स्टीमर, डीजल खत्म होने से बंद हुआ इंजन
उफनती चंबल नदी में उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब 64 यात्रियों से भरा स्टीमर अचानक बीच नदी में बंद हो गया। स्टीमर का डीजल खत्म होने के कारण इंजन ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद तेज बहाव के बीच स्टीमर करीब 5 किलोमीटर तक बहता रहा। गनीमत रही कि इस दौरान किसी यात्री की जान नहीं गई।
जानकारी के अनुसार, स्टीमर को चंबल नदी में उस समय उतारा गया, जब नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था और तेज बहाव चल रहा था। स्टीमर में कुल 64 यात्री सवार थे। यात्रा के दौरान अचानक डीजल खत्म हो गया और इंजन बंद पड़ गया। इंजन बंद होते ही स्टीमर नदी की धारा के साथ बहने लगा।
तेज बहाव के बीच स्टीमर के करीब 5 किलोमीटर तक बहने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। स्टीमर पर मौजूद लोगों को अपनी जान का खतरा सताने लगा। कई यात्रियों ने मदद के लिए आवाज लगाई। इस दौरान सभी की नजरें स्टीमर को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाने पर टिकी रहीं।
हालांकि राहत की बात रही कि स्टीमर पलटा नहीं और यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना ने नदी में यात्रियों की सुरक्षा और स्टीमर संचालन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर मानसून के दौरान जब नदी उफान पर हो, ऐसे समय में स्टीमर को पर्याप्त ईंधन और सुरक्षा इंतजामों के बिना चलाना जोखिम भरा माना जा रहा है।
घटना के बाद स्टीमर के संचालन से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह देखा जा सकता है कि यात्रा शुरू करने से पहले स्टीमर में पर्याप्त डीजल की जांच क्यों नहीं की गई। इसके अलावा तेज बहाव के बीच स्टीमर चलाने की अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी पड़ताल जरूरी है।
चंबल नदी में मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे में नाव या स्टीमर में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता है। यात्रियों की संख्या, लाइफ जैकेट, ईंधन और इंजन की स्थिति की जांच के बाद ही संचालन किया जाना चाहिए।
इस घटना ने प्रशासन के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 64 यात्रियों की जिंदगी कुछ देर के लिए तेज बहाव के भरोसे रह गई। यदि स्टीमर पलट जाता या किसी अन्य बाधा से टकरा जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन घटना को गंभीर लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्टीमर में डीजल की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी और उफनती चंबल में उसे चलाने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी ग

