मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया इलाके में एक भयावह और दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक बेटे ने मामूली विवाद के चलते अपने ही पिता पर फावड़े से हमला कर उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। घटना 3 फरवरी 2026 की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है।
स्थानीय पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान उनके बेटे द्वारा की गई है। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि विवाद इतना मामूली था कि किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए इसे हल्का समझा जा सकता था, लेकिन आरोपी बेटे ने गुस्से और आवेग में आकर फावड़े से हमला कर दिया, जिससे पिता की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपी ने किसी तरह के पछतावे या मदद के लिए किसी को सूचित नहीं किया और स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को जानकारी देने तक हत्या का पता नहीं चला। पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में अक्सर पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और आवेग प्रमुख कारण होते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में परिवारिक कलह और छोटे झगड़ों को गंभीरता से नहीं लेना कई बार भयानक परिणामों की वजह बन सकता है।
स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए सुनियोजित और भयावह संदेश देती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि इस तरह की घटनाओं की पूर्व चेतावनी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर ध्यान दिया जाए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हत्या और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या हत्या की योजना पूर्व में बनाई गई थी या यह क्षणिक आवेग में की गई घटना थी।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले की निंदा की और कहा कि परिवारिक हिंसा के मामले अक्सर छिपे रहते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या सामाजिक संगठनों से मदद लें, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में आवेग नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने परिवारों को यह सुझाव दिया कि वे बच्चों और युवाओं के मानसिक तनाव पर ध्यान दें और किसी भी छोटे विवाद को शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करें।
इस घटना ने यह साबित किया है कि मामूली विवाद कभी-कभी जीवन और मौत के बीच की सीमा में बदल सकता है। प्रशासन और समाज दोनों को चाहिए कि वे संवाद, समझ और सुरक्षा उपायों को बढ़ावा दें ताकि परिवारिक कलह कभी हिंसा का रूप न ले।

