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रायसेन में मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ा संकट: धान की फसल पर सबसे ज्यादा असर

रायसेन में मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ा संकट: धान की फसल पर सबसे ज्यादा असर

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार का सीधा असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। खासकर धान की खेती पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 2 जुलाई 2026 तक जिले में औसतन 142 मिमी (लगभग 5.59 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।

पिछले साल की तुलना में भारी गिरावट

पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले में 253.9 मिमी (लगभग 10 इंच) बारिश दर्ज की गई थी। इस साल बारिश में आई बड़ी गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि खरीफ सीजन की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर होती है।

धान की फसल पर संकट

कम बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है, जिससे धान की रोपाई और शुरुआती विकास पर असर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में किसान अभी भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रोपाई का काम आगे बढ़ाया जा सके।

किसानों की बढ़ी चिंता

किसानों का कहना है कि समय पर बारिश न होने से खेती का पूरा कैलेंडर बिगड़ सकता है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पैदावार में भारी कमी आने की आशंका है।

कृषि विभाग की नजर

कृषि विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश की स्थिति के अनुसार किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे नमी संरक्षण और वैकल्पिक सिंचाई साधनों का उपयोग करें।

बारिश पर टिकी उम्मीद

अब किसानों की नजर आगामी दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी है। यदि मानसून सक्रिय होता है तो स्थिति में सुधार संभव है, अन्यथा खरीफ उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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