दुकानें जलती रहीं, अफसरों की फाइल नहीं चली: मध्यप्रदेश में फायर सेफ्टी कानून लागू होने में देरी, न जुर्माना लग रहा और न कार्रवाई
मध्यप्रदेश में आगजनी की घटनाओं के बाद भी फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्य में अग्नि सुरक्षा से जुड़े कानून और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में हो रही देरी का खामियाजा आम लोगों और कारोबारियों को भुगतना पड़ सकता है। आरोप है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ न तो प्रभावी जुर्माना लगाया जा रहा है और न ही समय पर कार्रवाई हो रही है। ऐसे में बाजारों, दुकानों और व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आग लगने की घटनाओं में दुकानों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने के बाद फायर सेफ्टी नियमों की अहमियत और बढ़ जाती है। इसके बावजूद यदि नियमों को लागू करने वाली प्रक्रिया ही धीमी रहे, तो सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
फायर सेफ्टी कानून लागू होने में देरी पर सवाल
अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का उद्देश्य आग लगने की घटनाओं को रोकना और दुर्घटना होने की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम करना है। इसके लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, फायर अलार्म और जरूरत के अनुसार अन्य सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए।
मध्यप्रदेश में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में देरी को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित फाइलों पर समय पर निर्णय नहीं होने से नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
हालांकि, कानून लागू करने की वर्तमान स्थिति, लंबित फाइलों की संख्या और कार्रवाई नहीं होने के आधिकारिक कारणों की पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
बाजारों में आग से बड़ा खतरा
घनी आबादी वाले बाजारों में दुकानों के बीच कम दूरी, संकरे रास्ते, बिजली की खराब वायरिंग और ज्वलनशील सामान का भंडारण आग के खतरे को बढ़ा सकता है। यदि किसी दुकान या गोदाम में आग लग जाए, तो आसपास के प्रतिष्ठान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
ऐसी घटनाओं के दौरान दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में परेशानी होने पर आग पर काबू पाने में अधिक समय लग सकता है। इससे संपत्ति के नुकसान के साथ लोगों की जान को भी खतरा पैदा होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता आग से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जुर्माना और कार्रवाई जरूरी
फायर सेफ्टी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण, कमियों की पहचान और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जरूरी है। जहां नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने या अन्य दंड का प्रावधान हो, वहां उसका निष्पक्ष और समयबद्ध क्रियान्वयन होना चाहिए।
सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। प्रतिष्ठानों में मिली कमियों को दूर कराया जाना और जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करना भी जरूरी है। इसके साथ ही कारोबारियों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट रखनी चाहिए।
आम लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
फायर सेफ्टी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, दमकल विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक है। बाजारों में नियमित मॉक ड्रिल, अग्निशमन उपकरणों की जांच और आपातकालीन रास्तों को खुला रखने जैसे कदम दुर्घटनाओं के दौरान मददगार साबित हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश में फायर सेफ्टी कानून लागू करने में देरी के आरोपों के बीच अब निगाहें संबंधित विभागों की कार्रवाई पर रहेंगी। कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा मानकों का पालन कराने से ही ऐसी घटनाओं में नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।

