Samachar Nama
×

पहली शादी कायम होने पर दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

पहली शादी कायम होने पर दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पति की पहली शादी पहले से वैध रूप से अस्तित्व में है और दूसरी शादी या लिव-इन रिलेशनशिप के पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं, तो ऐसी महिला भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की हकदार नहीं होगी।

दूसरी शादी के दावे पर कोर्ट ने रखी स्थिति स्पष्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के तहत पत्नी का दर्जा पाने के लिए वैध वैवाहिक संबंध का होना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति की पहली शादी कानूनी रूप से कायम है और दूसरी शादी के संबंध में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, तो दूसरी महिला को पत्नी के रूप में भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं मिल सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल साथ रहने या दावा करने के आधार पर वैवाहिक अधिकार स्थापित नहीं हो जाते। इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी जरूरी हैं प्रमाण

हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप के मुद्दे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल संबंध होने का दावा पर्याप्त नहीं है। किसी रिश्ते को वैधानिक मान्यता देने के लिए उसके स्वरूप और परिस्थितियों को साबित करना जरूरी होगा।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्य और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लिया जा सकता है।

भरण-पोषण कानून पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 से जुड़े प्रावधानों के तहत सामने आया था। इस धारा का उद्देश्य ऐसे लोगों को आर्थिक सहायता देना है, जो खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का लाभ लेने के लिए दावे का कानूनी आधार होना आवश्यक है।

अदालत ने साक्ष्यों को माना अहम

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी मामले में केवल आरोपों के आधार पर अधिकार तय नहीं किए जा सकते। विवाह या संबंध की वास्तविक स्थिति साबित करने के लिए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का होना जरूरी है।

फैसले का व्यापक असर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक विवादों और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि दूसरी शादी या संबंध का दावा करने वाली महिला को अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

कोर्ट के इस निर्णय से ऐसे मामलों में निचली अदालतों के लिए भी कानूनी स्थिति और स्पष्ट होगी।

Share this story

Tags