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पंचगव्य से इलाज के नाम पर करोड़ों का घोटाला, जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी में 3.5 करोड़ की राशि का दुरुपयोग उजागर

पंचगव्य से इलाज के नाम पर करोड़ों का घोटाला, जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी में 3.5 करोड़ की राशि का दुरुपयोग उजागर

मध्य प्रदेश के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। पंचगव्य से कैंसर, टीबी और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के शोध के नाम पर शासन से प्राप्त साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि का दुरुपयोग किया गया। यह घोटाला वर्ष 2011 से 2018 के बीच का बताया जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, पंचगव्य (गाय से प्राप्त उत्पादों—गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) के माध्यम से गंभीर बीमारियों के इलाज पर शोध के लिए राज्य सरकार से भारी भरकम अनुदान स्वीकृत किया गया था। दावा किया गया था कि इस शोध से कैंसर, टीबी जैसी जानलेवा बीमारियों के उपचार के वैकल्पिक रास्ते खुल सकते हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि इस परियोजना में न तो ठोस वैज्ञानिक शोध हुआ और न ही तय मानकों का पालन किया गया।

जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर
ऑडिट और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शोध के लिए स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा अनियमित खर्चों, फर्जी बिलों और बिना अनुमति के भुगतान में खर्च कर दिया गया। कई उपकरणों और प्रयोगशाला सामग्री की खरीद केवल कागजों में दिखाई गई, जबकि मौके पर वे मौजूद ही नहीं थे। कुछ मामलों में ऐसे शोध कार्यों के भुगतान भी दर्शाए गए, जिनका कोई रिकॉर्ड या परिणाम उपलब्ध नहीं है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि परियोजना की अवधि के दौरान न तो कोई ठोस शोध रिपोर्ट सामने आई और न ही किसी चिकित्सा मान्यता प्राप्त जर्नल में शोध प्रकाशित हुआ, जबकि करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया गया।

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