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Satpura News: रक्षाबंधन पर बाघों की सुरक्षा की शपथ, 11 हजार ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बांधा ‘बाघ रक्षा सूत्र’

Satpura News: रक्षाबंधन पर बाघों की सुरक्षा की शपथ, 11 हजार ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बांधा ‘बाघ रक्षा सूत्र’

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व यानी STR में रक्षाबंधन का पर्व इस बार वन्यजीव संरक्षण के संदेश के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर करीब 11 हजार ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने ‘बाघ रक्षा सूत्र’ बांधकर बाघों की सुरक्षा और जंगल बचाने की प्रतिज्ञा ली। इस पहल के जरिए लोगों को वन्यजीवों की रक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और सुरक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है। इसी भावना को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाया गया। ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बाघ रक्षा सूत्र बांधकर जंगल और उसमें रहने वाले वन्यजीवों की रक्षा में सहयोग करने का संकल्प लिया।

11 हजार लोगों ने लिया संकल्प

अभियान के दौरान करीब 11 हजार ग्रामीणों और विद्यार्थियों को बाघ रक्षा सूत्र बांधा गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने बाघों की सुरक्षा, जंगलों के संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने की शपथ ली।

इस पहल का उद्देश्य वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और नई पीढ़ी को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से यह संदेश दिया गया कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि बाघ सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है।

रक्षाबंधन को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसी परंपरा की भावना को आगे बढ़ाते हुए बाघ रक्षा सूत्र के माध्यम से बाघों और जंगल की सुरक्षा का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में लोगों को वन्यजीवों के महत्व और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की जरूरत के बारे में जागरूक किया गया। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे जंगल और वन्यजीवों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी वन विभाग तक पहुंचाएं।

ग्रामीणों की भागीदारी अहम

टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीण वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जंगल से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सक्रिय भागीदारी से वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिल सकती है।

बाघ रक्षा सूत्र अभियान के जरिए ग्रामीणों को संरक्षण अभियान का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों की भागीदारी से इस संदेश को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

जंगल बचाने की ली प्रतिज्ञा

कार्यक्रम में शामिल ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने जंगल बचाने और बाघों की सुरक्षा में सहयोग करने की प्रतिज्ञा ली। लोगों ने वन क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को नुकसान नहीं पहुंचाने और वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित यह अभियान त्योहार को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आया। करीब 11 हजार लोगों की भागीदारी ने बाघ संरक्षण और जंगल बचाने के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाया। इससे स्थानीय समुदाय में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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