सतना बायोफ्यूल प्लांट प्रदूषण मामला: NGT ने कहा- मछलियों की मौत से सीधा संबंध साबित नहीं, संयंत्र और MPPCB को दिए निर्देश
मध्य प्रदेश के सतना जिले के सितपुरा स्थित रिलायंस बायोफ्यूल एनर्जी संयंत्र से कथित प्रदूषण और हजारों मछलियों की मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अपना फैसला सुना दिया है। एनजीटी ने उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कहा है कि संयंत्र और मछलियों की मौत के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
हालांकि, भविष्य में प्रदूषण की संभावनाओं को देखते हुए एनजीटी ने संयंत्र प्रबंधन और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान प्रदूषण और मछलियों की मौत से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। एनजीटी ने उपलब्ध रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि संयंत्र से निकले प्रदूषित पानी के कारण ही मछलियों की मौत हुई।अधिकरण ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर संयंत्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
भविष्य के लिए सतर्क रहने के निर्देश
हालांकि, एनजीटी ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को देखते हुए संयंत्र प्रबंधन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके संचालन से जल स्रोतों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।इसके साथ ही MPPCB को भी नियमित निगरानी करने और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
मछलियों की मौत के बाद उठा था विवाद
गौरतलब है कि सतना के सितपुरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई थी। लोगों ने आशंका जताई थी कि यह घटना संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट या प्रदूषण के कारण हुई है।इसके बाद मामले की जांच और कार्रवाई के लिए एनजीटी में याका दायर की गई थी।
पर्यावरण निगरानी जारी रहेगी
एनजीटी के फैसले के बाद अब संयंत्र प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी तरह की पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न न हो। अधिकरण के निर्देशों के बाद अब संयंत्र की निगरानी, अपशिष्ट प्रबंधन और जल गुणवत्ता की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

