कटनी में बारिश के बाद खराब हुईं ग्रामीण सड़कें, स्कूली बच्चों और मरीजों को हो रही परेशानी
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की हालत खराब हो गई है। कई गांवों में सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।
जिले के विजयराघवगढ़ और बड़वारा विधानसभा क्षेत्रों के दो गांवों में सड़क की समस्या गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में खराब सड़क के कारण गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
कीचड़ भरे रास्तों से गुजरने को मजबूर ग्रामीण
बारिश के बाद गांवों की सड़कें जगह-जगह खराब हो गई हैं। कई स्थानों पर मिट्टी बहने और गड्ढे होने से रास्ते पर चलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालकों को भी फिसलने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़क के कारण छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है। कई बार बच्चे कीचड़ भरे रास्तों से होकर स्कूल जाने को मजबूर होते हैं।
मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी
सड़क खराब होने का सबसे ज्यादा असर आपात स्थिति में देखने को मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार, किसी मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए वाहन बुलाना भी चुनौती बन जाता है। खराब रास्तों के कारण एंबुलेंस और अन्य वाहनों को गांव तक पहुंचने में समय लगता है।
बारिश के दिनों में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने की सड़क सुधार की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से सड़क की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी जरूरत है। अच्छी सड़क नहीं होने से गांव के विकास पर भी असर पड़ता है।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
बारिश के बाद जिले के कई ग्रामीण इलाकों में सड़कों की स्थिति खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही सर्वे कराकर खराब सड़कों की मरम्मत कराएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है, ताकि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और आम लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित न हो।

