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1872 करोड़ की जल परियोजना EOW जांच के दायरे में, सतना के सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाने की योजना पर सवाल

₹1872 करोड़ की जल परियोजना EOW जांच के दायरे में, सतना के सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाने की योजना पर सवाल

मध्य प्रदेश के सतना जिले में सैकड़ों गांवों तक पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई करीब 1872 करोड़ रुपए की जल परियोजना अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW की जांच के दायरे में है। परियोजना को लेकर कथित तौर पर 82 प्रतिशत काम केवल कागजों में पूरा दिखाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इतनी बड़ी राशि वाली योजना में काम की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाने की थी योजना

इस जल परियोजना का उद्देश्य सतना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी तक पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाना था। योजना के तहत सैकड़ों गांवों को लाभ मिलने की उम्मीद थी। परियोजना पूरी होने के बाद ग्रामीणों को घरों तक पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।

लेकिन अब योजना की प्रगति और जमीन पर हुए काम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना के तहत 82 प्रतिशत कार्य कागजी रिकॉर्ड में पूरा दर्शाया गया, जबकि मौके पर इसकी स्थिति अलग बताई जा रही है।

1872 करोड़ रुपए की परियोजना पर उठे सवाल

करीब 1872 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना में इतनी बड़ी राशि शामिल होने के कारण जांच का दायरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कागजों में काम पूरा दिखाए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी धन के इस्तेमाल और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

EOW अब परियोजना से जुड़े दस्तावेज, भुगतान, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्य और अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच कर सकती है। साथ ही रिकॉर्ड में दर्ज काम और मौके पर मौजूद वास्तविक ढांचे का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।

कागजी कार्रवाई के आरोपों की होगी जांच

परियोजना में 82 प्रतिशत काम कागजों में पूरा होने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके लिए संबंधित गांवों में हुए निर्माण कार्य, पाइपलाइन बिछाने, जलस्रोतों से कनेक्शन और अन्य जरूरी ढांचों का भौतिक सत्यापन किया जा सकता है।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि परियोजना के अलग-अलग चरणों में किस आधार पर भुगतान किया गया और जिन कार्यों को पूरा बताया गया, वे वास्तव में मौके पर कितने पूरे हुए हैं।

ग्रामीणों को पानी मिलने का इंतजार

एक तरफ करोड़ों रुपए की परियोजना जांच के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर योजना से लाभ की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों की नजर अब इसके परिणाम पर है। पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ी परियोजना में देरी या काम अधूरा रहने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ सकती है।

यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका तय की जा सकती है। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो वास्तविक स्थिति भी जांच के जरिए स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल 1872 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को लेकर EOW की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब जांच से यह सामने आएगा कि परियोजना में वास्तव में कितना काम हुआ, कितना भुगतान किया गया और 82 प्रतिशत काम कागजों पर पूरा दिखाए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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