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सतना में नामी पिज्जा आउटलेट पर जुर्माना, वेज पिज्जा में परोसा गया नॉन वेज मांस

सतना में नामी पिज्जा आउटलेट पर जुर्माना, वेज पिज्जा में परोसा गया नॉन वेज मांस

मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक नामी पिज्जा आउटलेट के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम ने बड़ा फैसला सुनाया है। शिकायत के मुताबिक, वेज पिज्जा की जगह नॉन वेज पिज्जा परोसने के मामले में फोरम ने उक्त पिज्जा कंपनी पर 8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

मामला सिविल लाइन क्षेत्र के पतेरी-पन्नानाका मार्ग स्थित इस फूड ब्रांच से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यहां उन्होंने वेज बर्गर और वेज पिज्जा ऑर्डर किया था, लेकिन कथित रूप से सूअर का मांस परोस दिया गया। यह घटना खाने की सुरक्षा और उपभोक्ता विश्वास के लिए गंभीर मामला बन गई।

इस मामले की सुनवाई लगभग डेढ़ साल तक चली। उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई के बाद पाया कि ग्राहक की शिकायत सही थी और पिज्जा आउटलेट ने उपभोक्ताओं को गुमराह किया। इसके चलते फोरम ने पिज्जा कंपनी को 8 लाख रुपये मुआवजा, 10 हजार रुपये वाद व्यय और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया।

फोरम के अध्यक्ष ने बताया कि यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी और भरोसेमंद सेवाएं मिलना उनका मूल अधिकार है। फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता सुरक्षा कानून के तहत कंपनी की जिम्मेदारी तय की गई है और किसी भी प्रकार का धोखाधड़ी या गलत जानकारी देना स्वीकार्य नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैसले से सतना और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि ग्राहक अब ज्यादा सतर्क होंगे और किसी भी तरह की ग़लत जानकारी मिलने पर सशक्त होकर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

फूड ब्रांच की ओर से फिलहाल इस निर्णय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य उद्योग में पारदर्शिता और सुरक्षा मानक बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेताया कि ऐसे मामलों से न केवल कंपनी का प्रतिष्ठा खतरे में पड़ती है, बल्कि उपभोक्ताओं का भरोसा भी प्रभावित होता है।

कुल मिलाकर, सतना जिले में उपभोक्ता फोरम का यह फैसला खाद्य सुरक्षा, ग्राहक अधिकार और पारदर्शिता के लिए मिसाल पेश करता है। पिज्जा आउटलेट पर 8 लाख रुपए का जुर्माना और ब्याज सहित मुआवजे का आदेश यह संदेश देता है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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