सरकारी स्मार्ट स्कूलों की हकीकत: भील कॉलोनी में 3 साल से अटका निर्माण, अहिल्या पल्टन में नया भवन तैयार फिर भी जर्जर कमरों में पढ़ रहे बच्चे
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की योजनाओं के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं। शहर के भील कॉलोनी क्षेत्र में स्मार्ट स्कूल का निर्माण करीब तीन साल से अटका हुआ है। वहीं अहिल्या पल्टन में नया स्कूल भवन तैयार होने के बावजूद बच्चों को अभी भी पुराने और जर्जर कमरों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट स्कूल योजना के तहत भवन निर्माण, आधुनिक कक्षाओं और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन निर्माण कार्य में देरी और तैयार भवन का उपयोग शुरू नहीं होने से योजना का लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
तीन साल से निर्माण का इंतजार
भील कॉलोनी में स्मार्ट स्कूल का निर्माण करीब तीन साल पहले शुरू होना था, लेकिन अब तक भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण विद्यार्थियों को पुरानी व्यवस्था में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन के निर्माण में लगातार देरी होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्मार्ट स्कूल के नाम पर शुरू किया गया प्रोजेक्ट अगर समय पर पूरा नहीं होगा तो विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं कब मिलेंगी, यह सवाल बना हुआ है।
नया भवन तैयार, फिर भी पुराने कमरों में कक्षाएं
अहिल्या पल्टन क्षेत्र में स्थिति और भी अलग है। यहां स्कूल का नया भवन तैयार हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों की कक्षाएं पुराने और जर्जर कमरों में संचालित हो रही हैं।
पुराने कमरों की स्थिति को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। उनका कहना है कि जब नया भवन बनकर तैयार हो चुका है तो बच्चों को वहां शिफ्ट किया जाना चाहिए। जर्जर कमरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्मार्ट स्कूल योजना पर उठे सवाल
सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से स्मार्ट स्कूलों की योजना शुरू की गई थी। इसके तहत स्कूलों में बेहतर भवन, आधुनिक कक्षाएं और विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया।
लेकिन भील कॉलोनी और अहिल्या पल्टन के मामलों ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक जगह भवन निर्माण तीन साल से पूरा नहीं हुआ, जबकि दूसरी जगह भवन तैयार होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
जिम्मेदार विभाग से कार्रवाई की उम्मीद
अभिभावकों और स्थानीय लोगों की मांग है कि स्कूल भवनों से जुड़े निर्माण कार्यों की स्थिति की समीक्षा की जाए। भील कॉलोनी में लंबित निर्माण को जल्द पूरा कराने के साथ अहिल्या पल्टन के तैयार भवन को विद्यार्थियों के लिए शुरू करने की मांग की जा रही है।
लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यदि नए भवन तैयार होने के बावजूद विद्यार्थी पुराने जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं, तो इसके कारणों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सरकारी स्मार्ट स्कूलों की यह स्थिति बताती है कि केवल भवन निर्माण की घोषणा या बजट जारी करना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं का समय पर पूरा होना और तैयार सुविधाओं का विद्यार्थियों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन दोनों स्कूलों की समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।

