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Ratlam पूर्व मेयर से 45 लाख की ठगी का केस

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 मध्य प्रदेश न्यूज़  45 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी सेल्स मैनेजर की जमानत याचिका प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार गुप्ता ने मंगलवार को खारिज कर दी।  पूर्व महापौर और व्यवसायी शैलेंद्र डागा के साथ आवेदन में मामले को धोखाधड़ी नहीं बल्कि अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन बताया था।

आरोपियों ने भोपाल की श्रीकृष्णन इस्पात एवं सीमेंट फैक्टरी में फरवरी में रतलाम के पूर्व महापौर और व्यवसायी शैलेंद्र डागा को सीमेंट की एजेंसी देकर 45 लाख रुपए डिपाॅजिट करवाए थे। अप्रैल में दूसरे  व्यक्ति को एजेंसी दे दी तो व्यवसायी डागा ने काम बंद कर डिपाजिट राशि वापस मांगी।

नगर भोपाल, काॅर्पोरेट हेड रमेश कुमार राहेराव भाई मार्केटिंग हेड सुरेश राहेराव दोनों निवासी  पुलिस ने कृष्णन इस्पात एवं सीमेंट कंपनी के मालिक हरीश कृष्णन निवासी राजीव पारस विहार कॉलोनी अवधपुरी भोपाल, अकाउंटेंट विकास डांगरे निवासी दीप नगर अवधपुरी भोपाल व रतलाम के मार्केटिंग और सेल्स मैनेजर हृदयेश द्विवेदी निवासी एरोज अपार्टमेंट के पीछे मित्रनिवास काॅलोनी, रीजनल सेल्स एवं मार्केटिंग मैनेजर ईश्वरलाल राठौड़ निवासी रत्नपुरी कॉलोनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।

पुलिस ने भोपाल से रमेश और सुरेश सोमवार को आवेदन दिया, मंगलवार को सुनवाई हुई अभियुक्त हृदेश द्विवेदी के अभिभाषक द्वारा सोमवार को प्रस्तुत जमानत आवेदन पर मंगलवार को बहस हुई। अभिभाषक ने तर्क दिया  तथा रतलाम से हृदेश और ईश्वरलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। भोपाल निवासी कंपनी का मालिक हरीश कृष्णन व अकाउंटेंट विकास डांगरे फरार हैं। कि हृदेश श्रीकृष्णन सीमेंट एवं इस्पात प्रालि. भोपाल में मार्केटिंग एवं सेल्स मैनेजर तथा ईश्वर राठौड़ रीजनल सेल्स एंड मार्केटिंग मैनेजर हैं। काम के बदले कमीशन मिलता है।

डिपाॅजिट के 45 लाख रुपयों में से राशि नहीं ली। अभिभाषक ने तर्क दिया कि दोनों पक्षों के बीच संव्यवहार दीवानी प्रकृति का है। आवेदन का विरोध करते हुए लोक अभियोजक छिपानी ने कहा कि मामला धोखाधड़ी का है। अनुबंध करते समय से धोखाधड़ी कर रहे थे फरियादी शैलेंद्र के साथ श्रीकृष्णन सीमेंट एवं इस्पात लिमि. के नाम से अनुबंध किया था। जब अनुबंध हुआ आरोपी हृदेश कंपनी के अधिकारियों के साथ मौजूद था। जिस कंपनी को खुद की बताया वह सतगुरु सीमेंट के नाम पर थी जिसके स्वामी इंदौर निवासी अन्य व्यक्ति है।

कृष्णन सीमेंट नाम से जो माल सप्लाई किया उसके जीएसटी बिल भी पोर्टल पर दर्ज नहीं किए। अभियुक्तों की वास्तव में सीमेंट उत्पादन की इंडस्ट्री नहीं है। यदि दोनों पक्षों के बीच अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का विवाद होता तो मामला आर्बिट्रेशन की शर्तों में निपटाया जाता। अभियुक्तों ने धोखाधड़ी की कि श्रीकृष्णन सीमेंट एंड इस्पात लिमि. सीमेंट उत्पादक इंडस्ट्री है जबकि वास्तव में उनकी इंडस्ट्री नहीं थी।

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