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बड़वानी में बारिश बनी किसानों की मुसीबत, अंजड़ में दो फीट तक खेतों में भरा पानी; कपास की फसल डूबी

बड़वानी में बारिश बनी किसानों की मुसीबत, अंजड़ में दो फीट तक खेतों में भरा पानी; कपास की फसल डूबी

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश से जहां किसानों को राहत मिली थी, वहीं अंजड़ क्षेत्र में यही बारिश अब परेशानी का कारण बन गई है। रातभर हुई तेज बारिश के बाद क्षेत्र के कई खेतों में करीब दो फीट तक पानी भर गया। खेतों में खड़ी कपास की फसल पानी में डूब गई है। इससे किसानों को फसल खराब होने और आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

बताया जा रहा है कि अंजड़ क्षेत्र में रात के दौरान लगातार बारिश हुई। बारिश का पानी खेतों से बाहर नहीं निकल सका और देखते ही देखते कई खेत जलमग्न हो गए। खेतों में पानी भरने से कपास की खड़ी फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर पौधे पानी में डूबे नजर आए।

लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बारिश की शुरुआत राहत लेकर आई थी। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई थी। बारिश होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि कपास सहित अन्य फसलों को फायदा मिलेगा, लेकिन तेज बारिश के बाद खेतों में जलभराव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

किसानों का कहना है कि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो कपास की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। जलभराव के कारण पौधों की जड़ें प्रभावित होने के साथ फसल में सड़न और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

क्षेत्र के किसानों ने खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के पानी की निकासी नहीं होने के कारण हर बार खेतों में जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि समय रहते पानी बाहर नहीं निकला तो फसल को बचाना मुश्किल हो सकता है।

बारिश के बाद खेतों की स्थिति का जायजा लेने और नुकसान का आकलन करने की मांग भी उठ रही है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन करना चाहिए, ताकि नुकसान होने की स्थिति में उन्हें उचित राहत मिल सके।

फिलहाल अंजड़ क्षेत्र के किसान खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं। बारिश ने एक ओर जहां जिले के कई किसानों को राहत दी है, वहीं जलभराव वाले इलाकों में किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अब आने वाले दिनों में मौसम और खेतों से पानी की निकासी पर किसानों की नजर बनी हुई है।

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