खरगोन में बारिश का ब्रेक, फसलों पर मंडराया संकट; कपास और सोयाबीन में घट रही नमी
खरगोन जिले में पिछले सात दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश का दौर थमने से खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। खासकर हल्की जमीन में लगी कपास और सोयाबीन की फसलों पर सूखे का असर दिखाई देने लगा है। फसल को बचाने के लिए किसान अब सिंचाई का सहारा लेने लगे हैं। पथरीली और भूरी मिट्टी वाली जमीन में किसानों ने कपास की सिंचाई शुरू कर दी है।
जिले में खरीफ सीजन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने कपास और सोयाबीन की बोवनी की है। शुरुआती दौर में हुई बारिश से फसलों को पर्याप्त नमी मिली थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की मिट्टी सूखने लगी है। हल्की जमीन में नमी जल्दी खत्म होने के कारण इन क्षेत्रों में फसलों पर इसका असर पहले दिखाई दे रहा है।
कपास की फसल को इस समय पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसी तरह सोयाबीन में भी नमी की कमी होने पर पौधों के विकास और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। किसानों ने फसल को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में उपलब्ध जल स्रोतों से सिंचाई शुरू कर दी है।
पथरीली और भूरी मिट्टी वाले क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। इन जमीनों में पानी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाता, जिससे बारिश का अंतर बढ़ने पर मिट्टी में नमी तेजी से कम हो जाती है। ऐसे में किसान कपास के खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। कई किसान अपने स्तर पर मोटर, कुएं और अन्य जल स्रोतों की मदद से फसल को पानी दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो सिंचाई का खर्च बढ़ सकता है। जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई साधन नहीं हैं, उनके लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों को फसल बचाने के लिए मौसम का इंतजार करना पड़ रहा है।
सोयाबीन की फसल में भी नमी की कमी को लेकर किसान चिंतित हैं। हल्की जमीन में बोई गई सोयाबीन में मिट्टी सूखने लगी है। यदि बारिश का अंतर और बढ़ता है तो फसल की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हुई हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेत की मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना खरीफ फसलों के लिए जरूरी है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसान आवश्यकता के अनुसार फसल को पानी दे सकते हैं। वहीं बारिश आधारित खेती वाले क्षेत्रों में किसानों को मौसम के अगले दौर का इंतजार करना पड़ रहा है।
लगातार एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खरगोन जिले में खरीफ फसलों की स्थिति पर चिंता बढ़ी है। फिलहाल किसान कपास और सोयाबीन को बचाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेतों में नमी की कमी दूर हो सकती है और फसलों को राहत मिलने की उम्मीद है।

