सड़क निर्माण की मांग को लेकर नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट गेट पर धरना, साढ़े छह घंटे तक डटे रहे लोग; 3 शर्तों के साथ दिया 3 महीने का अल्टीमेटम
सड़क निर्माण की मांग को लेकर नर्मदापुरम में लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। खराब सड़क से परेशान लोगों ने कलेक्ट्रेट गेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब साढ़े छह घंटे तक चला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट गेट के बाहर ही खाना बनाया, भोजन किया और रात भी वहीं गुजारी। लंबे चले आंदोलन के बाद प्रशासन के साथ बातचीत हुई, जिसके बाद तीन लिखित शर्तों के साथ तीन महीने का अल्टीमेटम देकर धरना समाप्त किया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र की सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। बारिश के दिनों में सड़क पर बने गड्ढों और कीचड़ के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते लोगों को मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ा।
कलेक्ट्रेट गेट पर ही बनाया खाना, वहीं किया आराम
सड़क निर्माण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्य गेट के बाहर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द सड़क बनाने की मांग रखी। आंदोलन के दौरान लोगों ने मौके पर ही खाना बनाया और खाया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे धरना जारी रखेंगे। कई घंटे तक लोग कलेक्ट्रेट गेट पर बैठे रहे। रात होने के बाद भी प्रदर्शनकारी मौके से नहीं हटे और वहीं रुककर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रशासन से हुई बातचीत के बाद बनी सहमति
धरने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने उनकी मांगों को सुना और जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से जुड़ी तीन लिखित शर्तें प्रशासन के सामने रखीं।
इन शर्तों को पूरा करने के लिए प्रशासन को तीन महीने का समय दिया गया है। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि तय समय सीमा में सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा बड़ा आंदोलन करेंगे।
खराब सड़क से परेशान हैं स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण रोजाना आने-जाने वालों को परेशानी होती है। गड्ढों के कारण वाहन चालकों के साथ हादसे का खतरा बना रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ती है।
लोगों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं। अब लोगों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
तीन महीने में कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आंदोलन
धरना समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तीन महीने के भीतर सड़क निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम शुरू होना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति के बाद धरना खत्म हो गया है। अब देखने वाली बात होगी कि तीन महीने की तय समय सीमा में सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन कितना प्रभावी कदम उठाता है।

