नागदा में नई रेल लाइनों के विरोध की शुरुआत, ‘नागदा बचाओ समिति’ गठित; बड़े आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर के तहत पश्चिम रेलवे की ओर से प्रस्तावित दो नई रेल लाइनों को लेकर नागदा में विरोध शुरू हो गया है। शहरवासियों और प्रभावित परिवारों ने इस परियोजना के खिलाफ आवाज उठाते हुए ‘नागदा बचाओ समिति’ का गठन किया है। समिति ने मांगों को लेकर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी है।
जानकारी के अनुसार, नई रेल लाइनों के विस्तार के लिए प्रस्तावित योजना से शहर के कई हिस्सों और स्थानीय लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर प्रभावित नागरिकों ने बैठक कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और आगे की रणनीति तैयार की।
शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं करते, लेकिन परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की समस्याओं और संभावित नुकसान को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि रेल लाइन विस्तार से कई परिवारों, व्यापारिक गतिविधियों और शहर की व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
बैठक में लोगों ने एकजुट होकर ‘नागदा बचाओ समिति’ का गठन किया। समिति के सदस्यों ने कहा कि वे प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएंगे। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और रेलवे द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
समिति की ओर से जल्द ही प्रशासन और रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा शहर के अन्य लोगों को भी आंदोलन से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रेलवे परियोजना से पहले विस्तृत सर्वे और जनसुनवाई जरूरी है, ताकि लोगों की आपत्तियों और सुझावों को शामिल किया जा सके। उन्होंने मांग की है कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण किया जाए।
वहीं, रेलवे की परियोजना को क्षेत्र के विकास और रेल सुविधाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। नई रेल लाइनों से भविष्य में परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण अब यह मामला चर्चा में आ गया है।
फिलहाल ‘नागदा बचाओ समिति’ के गठन के बाद शहर में इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में समिति की गतिविधियों और प्रशासन के रुख पर सभी की नजर रहेगी।

