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मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू करने का वादा अधूरा, तीन साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नहीं शुरू हुआ कोर्स

मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू करने का वादा अधूरा, तीन साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नहीं शुरू हुआ कोर्स

मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इस देरी के कारण स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों की उम्मीद कर रहे विद्यार्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह पाठ्यक्रम शुरू होने से विद्यार्थियों को कम खर्च में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई करने का अवसर मिल सकता था, लेकिन अब तक योजना जमीन पर नहीं उतर पाई है।

फिजियोथैरेपी स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें चोट, मांसपेशियों की समस्या, हड्डियों से जुड़ी परेशानियों और शारीरिक गतिविधियों में कमी से जूझ रहे मरीजों को उपचार के जरिए बेहतर बनाने में मदद की जाती है। अस्पतालों में फिजियोथैरेपिस्ट की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में सरकारी संस्थानों में इस विषय की पढ़ाई शुरू नहीं होना चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को लेकर सवाल खड़े करता है।

तीन साल बाद भी घोषणा पर अमल नहीं

मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा से विद्यार्थियों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें अपने ही राज्य में सरकारी संस्थानों के माध्यम से इस क्षेत्र में करियर बनाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, घोषणा के तीन साल बाद भी यह योजना पूरी नहीं हो सकी है।

सरकारी संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए बुनियादी सुविधाओं, प्रशिक्षित शिक्षकों, प्रयोगशालाओं और मरीजों को उपचार देने की व्यवस्था की जरूरत होती है। इसके अलावा पाठ्यक्रम संचालन के लिए संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी और आवश्यक मानकों का पालन करना भी जरूरी होता है। हालांकि, इस मामले में देरी की वास्तविक वजह क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष से ही हो सकेगी।

विद्यार्थियों को निजी संस्थानों पर रहना पड़ सकता है निर्भर

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू होने से विद्यार्थियों को फीस और दूसरे खर्चों के मामले में राहत मिलने की संभावना रहती है। सरकारी संस्थानों में सीटें उपलब्ध होने से उन विद्यार्थियों को भी अवसर मिल सकता है, जो आर्थिक कारणों से महंगे निजी संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाते।

कोर्स शुरू होने में देरी के कारण विद्यार्थियों को उपलब्ध दूसरे विकल्पों के आधार पर आगे की पढ़ाई की योजना बनानी पड़ सकती है। हालांकि, मध्यप्रदेश में वर्तमान में फिजियोथैरेपी के कितने संस्थान संचालित हैं और उनमें कितनी सीटें उपलब्ध हैं, इसका आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी अहम है कोर्स

फिजियोथैरेपी की शिक्षा का विस्तार केवल विद्यार्थियों के करियर तक सीमित नहीं है। इससे अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों के लिए प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। दुर्घटनाओं के बाद रिकवरी, सर्जरी के बाद पुनर्वास और लंबे समय से चल रही शारीरिक समस्याओं के उपचार में फिजियोथैरेपिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा पर अमल करना विद्यार्थियों और स्वास्थ्य सेवाओं, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अब घोषणा पर अमल का इंतजार

तीन साल बीतने के बाद भी योजना पूरी नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई शुरू करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। अब विद्यार्थियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाती है।

फिलहाल, कोर्स शुरू करने की संभावित तारीख, चयनित मेडिकल कॉलेजों और देरी के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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