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ओंकारेश्वर में अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश, बीमारी को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने पर जोर

ओंकारेश्वर में अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश, बीमारी को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने पर जोर

अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सिकल सेल रोग को केवल एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखने की बात कही और इसे सामाजिक जागरूकता, आनुवांशिक परामर्श और व्यवहार परिवर्तन से जोड़ने पर जोर दिया।

ओंकारेश्वर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और आमजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इसके रोकथाम के उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करना था।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सिकल सेल रोग केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर भी गहरा असर डालते हैं। इसलिए इसके समाधान के लिए समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है।

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समय पर जांच, सही परामर्श और जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इस बीमारी को लेकर विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल स्क्रीनिंग, परामर्श और उपचार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि शुरुआती चरण में पहचान होने पर इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीजों को बेहतर जीवन प्रदान किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सिकल सेल उन्मूलन के लिए लगातार स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है और हजारों लोगों की जांच की जा चुकी है।

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि यह बीमारी विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है, इसलिए वहां विशेष जागरूकता और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में समाज से अपील की कि वे इस बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करें और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग मिलकर ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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