ओंकारेश्वर तीर्थ में राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत, राज्यपाल और सांसद ने भेंट किए धार्मिक स्मृति चिन्ह
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर तीर्थ में एक विशेष अवसर पर देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu का भव्य स्वागत किया गया। दर्शन से पूर्व राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर औपचारिक रूप से स्वागत किया। इस दौरान पूरे कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ओंकारेश्वर तीर्थ में दर्शन के लिए पहुंची थीं, जहां सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस अवसर पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति का अभिनंदन किया और उन्हें विशेष स्मृति चिन्ह भेंट किए। पाटिल ने राष्ट्रपति मुर्मू को नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और ओंकारेश्वर तीर्थ का एक छायाचित्र उपहार स्वरूप प्रदान किया। इन प्रतीकात्मक भेंटों के माध्यम से प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर और धार्मिक आस्था को दर्शाया गया।
ओंकारेश्वर तीर्थ, जो नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थल है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए थे।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल और अन्य जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति को प्रदेश की धार्मिक विरासत और ओंकारेश्वर तीर्थ के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी दी। साथ ही इस अवसर को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया गया।
राष्ट्रपति के इस दौरे को न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के केंद्रों के प्रति राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित रखा गया ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस पूरे आयोजन ने एक बार फिर ओंकारेश्वर तीर्थ को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। राष्ट्रपति के आगमन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया और स्थानीय लोगों ने इसे गर्व का क्षण बताया।
फिलहाल यह दौरा प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूती से प्रस्तुत करने वाला माना जा रहा है।

