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मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद में मुनादी पर सियासत तेज, अधिकारी पर कार्रवाई की मांग उठी

मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद में मुनादी पर सियासत तेज, अधिकारी पर कार्रवाई की मांग उठी

मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जांच समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले ही मामले में कराई गई मुनादी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। मुनादी का आदेश जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है।

सुनवाई से पहले मुनादी कराने पर विवाद

जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र से जुड़े मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। समिति की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही संबंधित क्षेत्र में मुनादी कराए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

विरोध करने वालों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस तरह की कार्रवाई करना उचित नहीं था। इससे मामले को लेकर गलत संदेश गया है और निष्पक्ष जांच पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

मामले में मुनादी का आदेश जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है। राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों का कहना है कि अधिकारी ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया, इसलिए उनके खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारी की भूमिका और मुनादी कराने के कारणों की समीक्षा की जा रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

जाति प्रमाण-पत्र विवाद को लेकर पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी जारी है। अब मुनादी का मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मामले में जल्दबाजी दिखाई गई और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, सत्ता पक्ष की ओर से इस मामले में अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल सभी की नजर जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर है। समिति की सुनवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जाति प्रमाण-पत्र को लेकर उठे विवाद में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि मामले में तय प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा। वहीं, मुनादी को लेकर उठे विवाद की भी जांच की जा सकती है।

अब देखना होगा कि इस मामले में अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं और जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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