खंडवा में बच्चों की जान से खिलवाड़! 52 सीटर बस में ठूंस दिए 98 स्कूली बच्चे, थर्मल प्लांट की टाउनशिप में लापरवाही उजागर
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। संत सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट की शिवरिया टाउनशिप में सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बस में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस बस में केवल 52 बच्चों के बैठने की क्षमता है, उसमें करीब 98 बच्चों को ले जाया जा रहा था। इस मामले के सामने आने के बाद बच्चों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
52 सीटर बस में बैठाए गए 98 बच्चे
जानकारी के मुताबिक, संत सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट की शिवरिया टाउनशिप में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्कूल बसों की व्यवस्था की गई है। इसके लिए दो बसों का टेंडर किया गया था, ताकि बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल तक पहुंचाया जा सके। लेकिन इसके बावजूद एक ही बस में क्षमता से लगभग दोगुने बच्चों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने बताया कि बस में बच्चों को सीटों पर बैठाने के साथ-साथ खड़ा करके भी ले जाया जाता है। कई बार बस में इतनी भीड़ हो जाती है कि बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
टेंडर के बावजूद क्यों नहीं चल रही दोनों बसें?
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बच्चों के परिवहन के लिए दो बसों का टेंडर किया गया है, तो फिर एक ही बस में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को क्यों बैठाया जा रहा है। अभिभावकों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। क्षमता से ज्यादा बच्चों को बस में बैठाना नियमों के खिलाफ है और इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
इस मामले में थर्मल प्लांट प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
वहीं, मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों से जवाब मांगा जा रहा है। अब देखना होगा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और लापरवाही बरतने वालों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कई नियम निर्धारित हैं, जिनमें बस की क्षमता के अनुसार ही बच्चों को बैठाना, प्रशिक्षित चालक और उचित व्यवस्था शामिल है। ऐसे में खंडवा का यह मामला इन नियमों की अनदेखी को उजागर करता है।
फिलहाल मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासन और प्लांट प्रबंधन से उम्मीद की जा रही है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।

