जलसंकट के बीच पैकेज्ड पानी कंपनियों पर सवाल, 33 में से सिर्फ 8 ने दिया भूजल का हिसाब; 25 पर कार्रवाई अटकी
जलसंकट के बढ़ते खतरे के बीच भूजल के इस्तेमाल और सरकारी विभागों की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में पैकेज्ड पानी बेचने वाली 33 कंपनियों से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भूजल के इस्तेमाल का हिसाब मांगा था, लेकिन इनमें से केवल आठ कंपनियों ने ही जानकारी उपलब्ध कराई। बाकी 25 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि, एक महीने बीत जाने के बाद भी इन निर्देशों का पालन नहीं हो पाया है।
इस स्थिति ने सरकारी विभागों के बीच समन्वय और आदेशों के क्रियान्वयन की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भूजल की उपलब्धता पहले से ही कई क्षेत्रों में चिंता का विषय है। ऐसे में व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पानी निकालने वाली कंपनियों से संबंधित जानकारी जुटाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
33 कंपनियों से मांगा गया भूजल का हिसाब
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर में पैकेज्ड पानी का कारोबार करने वाली 33 कंपनियों से भूजल के इस्तेमाल का ब्योरा मांगा था। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि कंपनियां पानी कहां से प्राप्त कर रही हैं और भूजल के उपयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा रही हैं या नहीं।
लेकिन बोर्ड को केवल आठ कंपनियों की ओर से जानकारी मिली। शेष 25 कंपनियों ने निर्धारित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इससे भूजल के व्यावसायिक इस्तेमाल की निगरानी और संबंधित नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश भी बेअसर
जानकारी नहीं देने वाली 25 कंपनियों के खिलाफ बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए थे। इस कार्रवाई का उद्देश्य संबंधित कंपनियों पर नियमों का पालन करने के लिए दबाव बनाना था। लेकिन आदेश जारी होने के करीब एक महीने बाद भी निर्देशों का पालन नहीं हो सका।
इस देरी से यह सवाल उठता है कि जब किसी विभाग की ओर से कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं, तो उन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी किस स्तर पर है और इसमें देरी क्यों हो रही है। हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से देरी के कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जलसंकट के बीच भूजल की निगरानी जरूरी
भूजल घरेलू जरूरतों, खेती और कई व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है। लगातार और अनियंत्रित दोहन से भूजल स्तर पर दबाव बढ़ सकता है। पैकेज्ड पानी बनाने वाली कंपनियों को भी पानी के स्रोत और इस्तेमाल से जुड़े लागू नियमों का पालन करना जरूरी है।
भूजल की निगरानी के लिए कंपनियों से नियमित जानकारी लेना, आवश्यक अनुमतियों की जांच करना और नियमों का उल्लंघन होने पर नियमानुसार कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। इससे पानी के संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
विभागों के बीच समन्वय पर उठे सवाल
इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जानकारी मांगने और बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। किसी भी आदेश का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब संबंधित विभाग समय पर उसका पालन सुनिश्चित करें।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाकी 25 कंपनियों से भूजल के इस्तेमाल का विवरण कब तक प्राप्त किया जाता है और बिजली कनेक्शन काटने के निर्देशों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। जलसंकट की आशंका के बीच भूजल के इस्तेमाल की पारदर्शी निगरानी और सरकारी आदेशों का समय पर पालन करना जरूरी है।

