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932 अवैध कॉलोनियों में सिर्फ 59 पर कार्रवाई, 33 मामलों में FIR से परहेज; कलेक्टर ने निगम से मांगा पूरा हिसाब

932 अवैध कॉलोनियों में सिर्फ 59 पर कार्रवाई, 33 मामलों में FIR से परहेज; कलेक्टर ने निगम से मांगा पूरा हिसाब

शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सर्वे नंबरों की पड़ताल में सामने आया है कि शहर में चिन्हित 932 अवैध कॉलोनियों में से अब तक केवल 59 के खिलाफ ही कार्रवाई की गई है। वहीं, 33 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने से भी परहेज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने नगर निगम से पूरी कार्रवाई का हिसाब मांगा है।

प्रशासन की ओर से अवैध कॉलोनियों की पहचान के लिए सर्वे नंबरों की जांच कराई गई थी। जांच में बड़ी संख्या में ऐसी कॉलोनियां सामने आईं, जिनमें नियमों का पालन किए बिना विकास और प्लॉटिंग किए जाने की शिकायतें थीं। इसके बाद संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, कार्रवाई के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि कुल 932 चिन्हित अवैध कॉलोनियों में से महज 59 मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ पाई। इनमें भी कार्रवाई की प्रकृति और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर प्रशासन ने नगर निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा 33 मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कलेक्टर ने नगर निगम अधिकारियों से पूछा है कि चिन्हित अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई, किन मामलों में नोटिस जारी किए गए और किन मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई। साथ ही जिन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई, उनके कारण भी स्पष्ट करने को कहा गया है।

अवैध कॉलोनियों के कारण शहर में अनियोजित विकास के साथ सड़क, पानी, सीवर और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ता है। कई मामलों में आम लोगों को नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण प्लॉट खरीदने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी कार्रवाई को जरूरी माना जा रहा है।

प्रशासन अब सर्वे नंबरों के आधार पर प्रत्येक मामले की स्थिति की समीक्षा कर सकता है। अधिकारियों से लंबित मामलों का रिकॉर्ड तैयार करने और कार्रवाई में देरी के कारण बताने को कहा गया है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन मामलों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत है और किन मामलों में अन्य प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।

कलेक्टर द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद नगर निगम में संबंधित मामलों की फाइलों और रिकॉर्ड की जांच शुरू होने की संभावना है। अब देखना होगा कि 932 अवैध कॉलोनियों में से बाकी मामलों पर प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है और 33 मामलों में एफआईआर नहीं होने के पीछे क्या कारण सामने आते हैं।

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