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प्रार्थना की आवाज पर धर्मांतरण के आरोप का विरोध: UCC पर ईसाई धर्मगुरु बोले- घरों में धार्मिक गतिविधियों पर रोक जैसी स्थिति

प्रार्थना की आवाज पर धर्मांतरण के आरोप का विरोध: UCC पर ईसाई धर्मगुरु बोले- घरों में धार्मिक गतिविधियों पर रोक जैसी स्थिति

मध्यप्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर ईसाई धर्मगुरुओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक गतिविधियों को लेकर बढ़ती शिकायतों और आरोपों से समुदाय के लोगों में असहजता का माहौल बन रहा है। धर्मगुरुओं ने कहा कि कई जगहों पर घरों में प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियां किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।ईसाई धर्मगुरुओं के मुताबिक केवल प्रार्थना की आवाज सुनाई देने या घर में धार्मिक गतिविधि होने के आधार पर धर्मांतरण का आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था से जुड़े अधिकारों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।

प्रार्थना को धर्मांतरण से जोड़ने पर सवाल

ईसाई धर्मगुरुओं ने कहा कि घरों में प्रार्थना करना धार्मिक आस्था का हिस्सा है। यदि किसी घर से प्रार्थना की आवाज आती है तो उसे धर्मांतरण की गतिविधि से जोड़ना सही नहीं है।उनका कहना है कि धार्मिक गतिविधियों और जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। किसी भी आरोप की जांच तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए।

UCC को लेकर जताई चिंता

धर्मगुरुओं ने UCC को लेकर भी अपनी चिंताएं सामने रखी हैं। उनका कहना है कि समान नागरिक संहिता से जुड़े प्रावधानों को लागू करने से पहले सभी धार्मिक समुदायों की चिंताओं और अधिकारों पर विचार किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ नागरिकों को संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का भी संरक्षण होना चाहिए।

घरों में धार्मिक गतिविधियों पर सवाल उठने का दावा

ईसाई समुदाय के धर्मगुरुओं का आरोप है कि कुछ मामलों में निजी घरों में होने वाली प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियों को भी संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इससे लोगों में यह भावना पैदा हो रही है कि वे अपने घर में भी धार्मिक गतिविधियां करने को लेकर आशंकित रहें।उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी शिकायत पर निष्पक्ष जांच की जाए और केवल धार्मिक गतिविधि के आधार पर किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना न बनाया जाए।

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चर्चा

धर्मगुरुओं के बयान के बाद धार्मिक स्वतंत्रता, धर्मांतरण कानून और UCC को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। एक तरफ जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण रोकने के लिए कानूनों के पालन पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक समुदाय अपने संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग करते रहे हैं।फिलहाल धर्मगुरुओं ने स्पष्ट किया है कि प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियों को स्वतः धर्मांतरण मानना उचित नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि किसी भी मामले में आरोपों के बजाय प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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