लालघाटी पर रोज डेढ़ लाख लोग जाम में फंसते हैं, हाईवे की जमीन पर कब्जे से संकरी हुई सर्विस लेन
लालघाटी पर रोजाना लगने वाले जाम से हजारों वाहन चालकों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां करीब डेढ़ लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। जाम की वजह केवल बिजली का सब-स्टेशन नहीं, बल्कि हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन पर कब्जे भी बताए जा रहे हैं। वीआईपी रोड से लालघाटी की ओर मुड़ते ही सर्विस लेन की चौड़ाई 5 मीटर से भी कम रह जाती है, जबकि इसे 7 मीटर चौड़ा बनाया जाना था। सड़क की कम चौड़ाई के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है।
7 मीटर की जगह 5 मीटर से भी कम रह गई सर्विस लेन
लालघाटी की ओर जाने वाले वाहन चालकों के लिए सर्विस लेन पर आवागमन आसान नहीं है। वीआईपी रोड से लालघाटी की तरफ मुड़ने के बाद सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है। जानकारी के मुताबिक, इस सर्विस लेन को 7 मीटर चौड़ा बनाया जाना था, लेकिन मौके पर इसकी चौड़ाई 5 मीटर से भी कम रह गई है।
सड़क की चौड़ाई कम होने से वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। व्यस्त समय में वाहनों की संख्या बढ़ने पर यातायात धीमा हो जाता है और जाम की स्थिति बन जाती है।
हाईवे की अधिग्रहित जमीन पर कब्जे भी समस्या
लालघाटी पर जाम की समस्या के पीछे हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन पर कब्जों को भी एक कारण बताया जा रहा है। सड़क के लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण होने से सर्विस लेन को अपेक्षित चौड़ाई नहीं मिल पा रही है।
ऐसे में समस्या का समाधान केवल बिजली के सब-स्टेशन से जुड़ी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सड़क की उपलब्ध चौड़ाई, अधिग्रहित जमीन और उस पर मौजूद कब्जों की स्थिति की भी जांच जरूरी है।
रोजाना बड़ी संख्या में लोग होते हैं प्रभावित
लालघाटी क्षेत्र में रोज करीब डेढ़ लाख लोगों के जाम से प्रभावित होने का आंकड़ा बताया गया है। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भीड़ के कारण देरी और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। यदि सर्विस लेन की चौड़ाई कम बनी रहती है, तो यातायात का दबाव संभालना मुश्किल हो सकता है।
जाम की समस्या दूर करने के लिए सर्विस लेन की निर्धारित चौड़ाई सुनिश्चित करना और अधिग्रहित जमीन पर कब्जों की स्थिति स्पष्ट करना अहम होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित विभाग की कार्रवाई, कब्जों को हटाने की योजना और समस्या के समाधान की समयसीमा का विवरण नहीं है।

