भादौ के दूसरे सोमवार पर बाबा महाकाल की शाही सवारी, फुटेज में देंखे 6 स्वरूपों में दिए भक्तों को दर्शन; उमड़ी आस्था की भीड़
उज्जैन में भादौ मास के दूसरे सोमवार पर बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई। परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान बाबा महाकाल ने भक्तों को छह अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन दिए। सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा शहर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
महाकाल की सवारी में रजत पालकी में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर विराजमान रहे, जबकि हाथी पर मनमहेश स्वरूप ने भक्तों को दर्शन दिए। गरु रथ पर भगवान शिवतांडव और नंदी रथ पर उमामहेश स्वरूप शामिल रहे। इसके अलावा दो अलग-अलग रथों पर होल्कर स्टेट का मुखारबिंद और सप्तधान मुखारबिंद भी सवारी का हिस्सा बने।करीब 7 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिला। भक्त बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए घंटों पहले से मार्ग के दोनों ओर खड़े नजर आए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
गर्मी और उमस से राहत के लिए फॉगिंग मशीन से ठंडा किया गया मार्ग
उज्जैन में गर्मी और उमस को देखते हुए सवारी मार्ग पर विशेष व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए पूरे मार्ग पर फॉगिंग मशीनों से पानी की फुहारें छोड़ी गईं, जिससे वातावरण को ठंडा रखा जा सके। बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी व्यवस्थाओं की निगरानी में जुटे रहे।सवारी में कोयंबटूर से आया ईशा फाउंडेशन का विशेष बैंड भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा करीब 70 भजन मंडलियां भक्ति गीतों की प्रस्तुति देते हुए सवारी में शामिल हुईं। अलग-अलग धार्मिक स्वरूपों में सजे श्रद्धालुओं ने भी महाकाल की सवारी की शोभा बढ़ाई।
भजन मंडली के दौरान बुजुर्ग महिला हुई बेहोश
बाबा महाकाल की सवारी के दौरान एक घटना भी सामने आई। भजन मंडली के बीच एक बुजुर्ग महिला अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें गोद में उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। समय रहते सहायता मिलने से महिला को उपचार के लिए भेजा गया।
ओंकारेश्वर में भगवान ओंकार की सवारी भी निकली
उधर, खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में भी भगवान ओंकार की सवारी निकाली गई। भगवान ओंकार की सवारी कोटितीर्थ घाट पहुंची, जहां वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच बाबा का पंचामृत अभिषेक किया गया।अभिषेक के बाद भगवान ओंकार नौका विहार के लिए रवाना होंगे। इस दौरान बाबा ओंकारेश्वर की ओंकार पर्वत की परिक्रमा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन और भादौ मास में निकलने वाली भगवान शिव की सवारियों का विशेष महत्व होता है और इसमें शामिल होकर श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

