Samachar Nama
×

विजयादशमी पर निकली बाबा महाकाल की सवारी, रजत पालकी में मनमहेश स्वरूप ने दिए दर्शन

विजयादशमी पर निकली बाबा महाकाल की सवारी, रजत पालकी में मनमहेश स्वरूप ने दिए दर्शन

उज्जैन में विजयादशमी पर्व के अवसर पर मंगलवार को भगवान महाकालेश्वर की सवारी निकाली गई। इस दौरान बाबा महाकाल के मनमहेश स्वरूप का पूजन कर उन्हें रजत पालकी में विराजमान कराया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।

सवारी से पहले शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडपम में विधि-विधान से पूजन किया गया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान महाकाल के मनमहेश स्वरूप को चांदी की पालकी में विराजमान कराया गया। इसके बाद विजयादशमी के अवसर पर सवारी की परंपरा निभाई गई।

सभामंडपम में हुआ विधि-विधान से पूजन

विजयादशमी पर महाकालेश्वर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। मंगलवार को भी मंदिर के सभामंडपम में शाम 4 बजे पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। पुजारियों ने परंपरानुसार भगवान का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद मनमहेश स्वरूप को रजत पालकी में विराजमान कराया।

भगवान महाकाल के मनमहेश स्वरूप के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। त्योहार के अवसर पर मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और भक्तों ने बाबा महाकाल के जयकारे लगाए।

विजयादशमी पर सवारी की परंपरा

उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारियां धार्मिक परंपरा और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विशेष पर्वों पर बाबा के विभिन्न स्वरूपों का पूजन किया जाता है और निर्धारित परंपराओं के अनुसार आयोजन होता है। विजयादशमी के दिन निकाली गई सवारी भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी रही।

विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। देशभर में इस दिन शस्त्र पूजन, रावण दहन और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी ने पर्व के धार्मिक महत्व को और विशेष बना दिया।

श्रद्धालुओं के लिए खास रहा पर्व

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। यहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पर्व और विशेष अवसरों पर मंदिर की धार्मिक गतिविधियों को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।

विजयादशमी पर मनमहेश स्वरूप को रजत पालकी में विराजमान कर सवारी निकाले जाने की परंपरा ने श्रद्धालुओं को बाबा की आराधना का विशेष अवसर दिया। भक्तों ने भगवान महाकाल से परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

जय श्री महाकाल!

Share this story

Tags