रतलाम में नवजात बच्चों को अपने पास रख रही थीं सरकारी अस्पतालों की नर्सें, नाबालिगों की डिलीवरी के बाद 2 मामले उजागर
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के ग्रामीण इलाकों में नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी और उनके नवजात बच्चों को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में ऐसे दो मामले उजागर हुए हैं, जिनमें सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने नाबालिगों की डिलीवरी कराने के बाद उनके नवजात बच्चों को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से अपने पास रखा। इस खुलासे के बाद अस्पतालों की कार्यप्रणाली और नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले की गंभीरता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इसमें नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी और उनके बच्चों की देखभाल से जुड़े संवेदनशील पहलू शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद नवजात की सुरक्षा, मां के अधिकार और बच्चे की कानूनी स्थिति सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी होती है।
पड़ताल में सामने आए दो मामले
दैनिक भास्कर की पड़ताल में रतलाम के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े दो मामले सामने आए हैं। दोनों मामलों में सरकारी अस्पतालों की नर्सों पर नवजात बच्चों को अनधिकृत रूप से अपने पास रखने के आरोप हैं। बताया गया है कि नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी के बाद बच्चों को नर्सों के पास रखा गया।
इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर किस प्रक्रिया के तहत नवजात बच्चों को उनकी मां से अलग किया गया और उन्हें नर्सों के पास रखने का निर्णय किसने लिया। क्या इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को जानकारी थी या यह सब बिना आधिकारिक अनुमति के हुआ, इसकी जांच जरूरी है।
नाबालिगों की डिलीवरी ने बढ़ाई चिंता
नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी का मामला स्वास्थ्य और बाल संरक्षण, दोनों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में केवल प्रसव कराना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मां और नवजात की सुरक्षा के साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है।
नाबालिग गर्भधारण के मामलों में संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार सूचना देना और बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्था सक्रिय करना आवश्यक होता है। नवजात को किसी दूसरे व्यक्ति के पास रखने या उसकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपने के लिए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
दो मामलों के उजागर होने के बाद सरकारी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यह पता लगाना जरूरी है कि नवजात बच्चों को नर्सों के पास रखने के पीछे क्या वजह थी, इसके लिए किसी अधिकारी की अनुमति ली गई थी या नहीं और बच्चों की वर्तमान स्थिति क्या है।
साथ ही, संबंधित नर्सों और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में बच्चों को अपने पास रखने की वजह, उनकी वर्तमान स्थिति और स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल दोनों नवजात बच्चों की सुरक्षा और उनके कानूनी संरक्षण का है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

