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मध्य प्रदेश में 2152 वर्गफीट तक मकान बनाने के लिए नहीं लेनी होगी अनुमति, स्वघोषणा पत्र और ऑनलाइन फीस से मिलेगा ऑटो अप्रूवल

मध्य प्रदेश में 2152 वर्गफीट तक मकान बनाने के लिए नहीं लेनी होगी अनुमति, स्वघोषणा पत्र और ऑनलाइन फीस से मिलेगा ऑटो अप्रूवल

मध्य प्रदेश में अब 2152 वर्गफीट यानी 200 वर्गमीटर तक के मकान बनाने के लिए लोगों को नगरीय निकायों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत मकान बनाने के इच्छुक लोगों को स्वघोषणा पत्र देना होगा और निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। इसके बाद निर्माण की स्वतः अनुमति मिल सकेगी। इस व्यवस्था से भवन निर्माण की मंजूरी के लिए लगने वाले समय और सरकारी कार्यालयों की भागदौड़ से राहत मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था के तहत मकान मालिक या आवेदक को निर्माण से संबंधित जरूरी जानकारी स्वयं घोषित करनी होगी। इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अनुमति मिल जाएगी। यानी छोटे आवासीय भवनों के निर्माण के लिए पहले की तरह नगरीय निकायों में आवेदन देकर लंबे समय तक मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

स्वघोषणा पत्र के आधार पर मिलेगी अनुमति

नई व्यवस्था में आवेदक को अपने प्रस्तावित मकान के निर्माण से जुड़ी जानकारी स्वघोषणा पत्र में देनी होगी। इसके साथ ही निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण की स्वतः अनुमति मिल सकेगी।

इसका उद्देश्य भवन निर्माण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। छोटे मकान बनाने वाले लोगों को दस्तावेजों और अनुमति के लिए बार-बार नगरीय निकायों के कार्यालयों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑनलाइन व्यवस्था से आवेदन की प्रक्रिया भी आसान होगी।

पहले से बने मकानों में 18 तरह के कामों के लिए भी राहत

नई व्यवस्था में केवल नए मकान बनाने वालों को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि पहले से बने मकानों में कुछ निर्माण और बदलाव के कामों को भी मंजूरी की जरूरत से बाहर रखा गया है। इसके तहत बाउंड्रीवॉल बनाना, पार्टिशन करना और शेड लगाना जैसे कुल 18 तरह के काम बिना पूर्व अनुमति के किए जा सकेंगे।

इससे मकान मालिकों को छोटे-मोटे निर्माण और मरम्मत संबंधी कामों के लिए भी नगरीय निकायों की अनुमति लेने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा। अभी कई बार घर में सामान्य बदलाव या अतिरिक्त सुविधा तैयार करने के लिए भी लोगों को अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

निर्माण प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी

सरकार की इस पहल का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को कम करना और नागरिकों को सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। खासकर छोटे भूखंडों पर मकान बनाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है।

हालांकि, स्वतः अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं होगा कि निर्माण में भवन निर्माण से जुड़े नियमों की अनदेखी की जा सकेगी। आवेदक को स्वघोषणा पत्र में दी गई जानकारी और लागू निर्माण मानकों का पालन करना होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

इस व्यवस्था से लोगों को निर्माण की शुरुआत करने में आसानी होगी और नगरीय निकायों पर छोटे भवनों की अनुमति से जुड़ा प्रशासनिक बोझ भी कम होने की उम्मीद है।

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