एनजीटी ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट, रामसर साइट होने के बावजूद वेटलैंड के रूप में दर्ज नहीं बड़ा तालाब
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बड़ा तालाब एक बार फिर चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट के रूप में पहचान रखने वाले बड़े तालाब को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। रामसर साइट होने के बावजूद बड़ा तालाब सरकारी रिकॉर्ड में वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि के रूप में दर्ज नहीं है। इस मामले में एनजीटी ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है।
एनजीटी की इस कार्रवाई के बाद बड़े तालाब के संरक्षण और उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है। मुख्य सचिव से मांगी गई रिपोर्ट में तालाब की मौजूदा स्थिति और उसे वेटलैंड के रूप में दर्ज नहीं किए जाने से जुड़े पहलुओं पर जानकारी मांगी गई है।
रामसर साइट है बड़ा तालाब
भोपाल का बड़ा तालाब प्रदेश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल संपदाओं में शामिल है। इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। रामसर साइट का दर्जा उन जल क्षेत्रों को दिया जाता है, जो पर्यावरण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं।
बड़े तालाब का महत्व केवल भोपाल की जलापूर्ति तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र कई प्रकार के जलीय जीवों और पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा यह शहर के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
वेटलैंड के रूप में दर्ज नहीं होने पर सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा मिलने के बावजूद बड़ा तालाब सरकारी रिकॉर्ड में वेटलैंड के रूप में दर्ज नहीं है। इसी स्थिति को लेकर एनजीटी ने संज्ञान लिया है।
वेटलैंड के रूप में किसी जल क्षेत्र का आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होना उसके संरक्षण और प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे संबंधित क्षेत्र की सीमाओं, पर्यावरणीय महत्व और संरक्षण संबंधी नियमों को स्पष्ट करने में मदद मिलती है।
ऐसे में बड़ा तालाब रामसर साइट होने के बावजूद वेटलैंड के रूप में दर्ज क्यों नहीं है, यह जांच और जवाबदेही का विषय बन गया है।
मुख्य सचिव को देनी होगी रिपोर्ट
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि बड़े तालाब को वेटलैंड के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया की क्या स्थिति है और अब तक इसमें देरी क्यों हुई।
रिपोर्ट के जरिए तालाब के संरक्षण, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
तालाब के संरक्षण पर रहेगी नजर
भोपाल के बड़े तालाब का पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व काफी अधिक है। यह शहर की पहचान होने के साथ जल संसाधन और जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इसके संरक्षण से जुड़े नियमों और सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की विसंगति को दूर करना जरूरी है।
अब एनजीटी की कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या रिपोर्ट पेश करती है और बड़े तालाब को वेटलैंड के रूप में दर्ज कराने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

